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भाजपा की आंधी में जीते कृष्णपाल गुर्जर

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भाजपा की आंधी में जीते कृष्णपाल गुर्जर

फरीदाबाद। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार एवं निवर्तमान सांसद कृष्णपाल गुर्जर अंडर करंट के बदौलत जीत का सेहरा पहनकर निकले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के उम्मीदवार अवतार सिंह भड़ाना को पांच लाख से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया। जीतने के बाद गुर्जर बोले कि वह क्षेत्र की जनता की अपेक्षाओं को अवश्य पूरा करेंगे।
कृष्णपाल गुर्जर ने सुबह पहले राउंड से ही बढ़त बनाकर रखी जो आखिर तक कायम रही। भाजपा समर्थकों ने सुबह से ही उनके नाम के बधाई होर्डिंग लगाने शुरू कर दिए थे। शुरुआत धीमी मतगणना से हुई लेकिन दोपहर होते-होते मतों का अंतर इतना बढ़ गया कि सभी ने इसे एकतरफा जीत करार दे दिया। कृष्ण पाल गुर्जर को करीब 70% मत प्राप्त हुए जबकि करीब 20% मतों के साथ अवतार सिंह भड़ाना दूसरे नंबर पर रहे।
कृष्ण पाल गुर्जर को 8,46,795 मत प्राप्त हुए वहीं भड़ाना को 2,35,670 मतों से ही संतोष करना पड़ा। गुर्जर की जीत का अंतर छह लाख को पार कर गया। यहां कुल 13,28,720 मत पड़े थे। खबर लिखे जाने तक इसमें से 12,08,754 वोट की गिनती हो चुकी थी जबकि 1,19,966 वोटों की गिनती बाक़ी रही थी।
2014 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के कृष्णपाल गुर्जर ने तब के कांग्रेसी सांसद अवतार सिंह भड़ाना को करीब 4 लाख 67 हजार मतों से हराकर यह सीट जीती थी।
यहां उल्लेखनीय है कि फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में आप-जजपा गठबंधन के प्रत्याशी एवं आप के प्रदेश अध्यक्ष पंडित नवीन जयहिंद कोई खास चमत्कार नहीं कर सके वहीं इनेलो के प्रत्याशी महेंद्र चौहान भी कुछ हजार में सिमट कर रह गए। हालांकि बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी मनधीर सिंह मान अपनी जमानत बचा पाने में सफल हो गए।
जीत दर्ज करने के बाद गुर्जर ने कहा यह जीत क्षेत्र की जनता की जीत है, देश की जीत है और मोदी मनोहर की जीत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बहुत अच्छा कार्य किया जिसकी बदौलत हम जनता तक अपनी सरकार की नीतियों को पहुंचा सके, जो आज जीत के रूप में हमें प्राप्त हुई है। दोबारा मंत्री बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा में खुद दावा करने की परिपाटी नहीं है। यह सब पार्टी नेतृत्व तय करता है। पार्टी का जो भी आदेश होगा उसे मानेंगे।
वहीं हार के बाद कांग्रेस प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना ने कहा कि इस चुनाव में भाजपा ने धनबल, बाहुबल सभी का खुलकर इस्तेमाल किया और प्रशासन का भी गलत इस्तेमाल किया। जिसकी उन्होंने शिकायत भी की और एक जगह पर पुनर्मतदान भी हुआ। इसी से साबित हो जाता है कि भारतीय जनता पार्टी ने हर प्रकार के बल का प्रयोग कर यह जीत हासिल की है। जिसके बारे में वह अभी अपने लीगल एडवाइजर से बात कर रहे हैं। इस बारे में शीघ्र ही आगे की कार्रवाई की जाएगी

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Exclusive : सीएम ऑफिस चूका या साजिश का शिकार बन गया?

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हरियाणा प्रोगे्रसिव स्कूल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष एसएस गुसाईं को लेकर चल रही अंदरुनी राजनीति तो नहीं कारण

शकुन रघुवंशी
फरीदाबाद। कोरोना काल में लगभग हर धंधा मंदा है लेकिन इन दिनों पब्लिक स्कूलों पर छात्रों की फीस न लेने का प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा रहा है। इसी बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के एक ट्वीट ने जैसे बासी कढ़ी में उबाल ला दिया। हालांकि सीएम ऑफिस ने समझदारी दिखाते हुए मामले पर पलस्तर कर दिया, लेकिन सवाल है कि इतनी बड़ी चूक लापरवाही से हुई या सीएम ऑफिस साजिश का शिकार हो गया?

सीएम ऑफिस से जारी पहला प्रेस नोट

अब घटनाक्रम को समझें। दिनांक 16 अप्रैल को सीएम मनोहर लाल ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट की जिस तेजी से हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में चर्चा हुई, उससे पहले शायद ही सीएम के किसी अन्य ट्वीट की हुई हो। सीएम ने उस ट्वीट में फरीदाबाद के सेक्टर 9 स्थित डिवाइन पब्लिक स्कूल द्वारा छात्रों की तीन महीने की फीस माफ करने की प्रशंसा करते हुए अन्य स्कूलों से भी अनुसरण करने की उम्मीद जता दी। बात यहीं नहीं रुकी। सीएम ऑफिस ने इस बारे में तमाम मीडिया को प्रेस नोट भी जारी कर दिया।

स्कूल की सफाई के बाद जारी संशोधित प्रेस नोट

ट्वीट की प्रशंसा बढ़ी तो आवाज डिवाइन स्कूल के संस्थापक एसएस गुसाईं और उनके बेटे व प्रिंसिपल विकास गुसाईं तक भी पहुंची। उन्होंने किसी तरह सीएम ऑफिस से संपर्क कर सही बात रखी। इसके बाद उसी दिन सीएम के पीआर विभाग ने शाम 7.35 बजे जारी प्रेस नोट का संशोधन रात 10.05 बजे पर जारी हो गया और सीएम का ट्वीट भी डिलीट कर दिया। हालांकि अगले दिन कई अखबारों ने पहले वाला ही प्रेस नोट छापा और सोशल मीडिया पर अनगिनत पोस्ट लिखे गए।
लेकिन यह बात इतनी सी नहीं है?
आप इसको इतनी सी बात कहकर अगर खारिज करना चाहते हैं तो कर दीजिए लेकिन ढाई करोड़ जनता वाले प्रदेश में यह बहुत बड़ी बात है। सवाल है कि ढाई करोड़ जनता का नेतृत्व करने वाले सीएम मनोहर लाल की टीम में ऐसे कैसे लोग भर्ती कर लिए हैं जो इतनी बड़ी बात को बिना वैरीफाई किए सीएम के अकाउंट से ट्वीट कर देते हैं और उसके बाद प्रेस नोट भी जारी कर देते हैं। यह सहज प्रेक्टिस है कि सीएम की ओर से जाने वाली हर बात को क्रॉस चैक होना चाहिए। सवाल लाजिमी है कि सीएम की टीम में कहीं नौसिखिए लोग तो भर्ती नहीं कर लिए गए हैं?

स्कूल का पहला विज्ञापन

ट्वीट का आधार क्या था, वो भी जानिए?

विकास गुसाईं

डिवाइन स्कूल के प्रिंसिपल विकास गुसाईं ने बताया कि उन्होंने अगले शैक्षिक सत्र के लिए एक विज्ञापन

बनवाकर डिजिटली प्रचारित किया। जिसमें हैसल फ्री एडमिशन, नो एडमिशन फी, नो एडमिशन टेस्ट सहित अप्रैल मई जून की फीस भी माफ करने की बात लिखी थी।
लेकिन यह सब बाहर से आने वाले छात्रों के लिए प्रचारित किया गया था न कि मौजूदा छात्रों के लिए। बकौल गुसाईं, एडमिशन तो बाहर के छात्रों का ही होता है, न कि मौजूदा छात्रों का। एडमिशन टेस्ट भी बाहर से आने वाले छात्रों का ही होता है। इस बात को सीएम साहब की टीम ने गलत समझ लिया और हमसे क्रॉस वैरीफाई भी नहीं किया। जब इस बारे में हमारे पास फोन आने लगे तो हमने सीएम ऑफिस को बताया, जिसके बाद उन्होंने तुरंत सुधार भी कर लिया।

संशोधित विज्ञापन

विकास गुसाईं का कहना है कि उनके संसाधन बेहद सीमित हैं और वह स्कूल खर्च के लिए छात्रों से मिलने वाली फीस पर निर्भर हैं। ऐसे में वह पूरे स्कूल की तीन महीने की फीस माफ करने की सोच भी नहीं सकते हैं।
यहां ऐसा लगता है कि सीएम की टीम से शायद लापरवाही ही हो गई थी?
लेकिन मामले में एक और पेंच भी है।
वास्तव में डिवाइन स्कूल के संस्थापक एसएस गुसाईं का पूरे प्रदेश की शिक्षक बिरादरी में बड़ा सम्मान है। गुसाईं ने स्कूल बनाने के बाद कभी भी ट्यूशन नहीं पढ़ाया और उन्हें प्रिंसिपल्स वाला व्यक्ति कहा जाता है।
फिलहाल गुसाईं हरियाणा प्रोगे्रसिव स्कूल्स कांफ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं जो हजारों स्कूलों

एस एस गुसाईं

का नेतृत्व करती है। कहा जाता है कि यह प्रदेश के स्कूल्स की सबसे बड़ा संस्था है। सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग अंदरखाने कांफ्रेंस में नेतृत्व परिवर्तन की मुहिम चला रहे हैं। लेकिन वह सफल नहीं हो पा रही है। हालांकि गुसाईं के बेटे विकास का कहना है कि वह अपनी सेहत के मद्देनजर अपनी जिम्मेदारी छोडऩा चाहते हैं लेकिन उनके शुभचिंतक उन्हें ऐसा करने से रोकते रहे हैं।
आशंका है कि इन परिवर्तनबाजों ने ही सीएम ऑफिस को डिवाइन स्कूल के विज्ञापन को लेकर भ्रम में डाला और वहां से ट्वीट जारी करवाया। इस ट्वीट के बाद पूरी एचपीएससी में अचानक एसएस गुसाईं घिर गए और उनको जवाब तक देते नहीं बना। सूत्रों का कहना है कि गुसाईं की एचपीएससी बैठक में कोई सुनने के लिए तैयार नहीं हुआ और उनको अपने सही विज्ञापन में भी सुधार करने के लिए बाध्य किया गया। गुसाईं ने नो मंथली फी फ्रॉम अप्रैल 20 से जून 20 के नीचे विद इन ब्रेकैट्स लिखा – इफ ऑलरेडी पेड इन प्रीवियस स्कूल।
आशंका जताई जा रही है कि एचपीएससी में परिवर्तन की लौ जलाने वाले क्रांतिवीरों ने ही इस ऊहापोह की स्थिति को जन्म दिया होगा? हालांकि हमारी सीएम ऑफिस को सलाह है कि इस मामले की अंदरूनी जांच अवश्य ही करवा लें कि यह ट्वीट केवल लापरवाही था या कोई साजिश का हिस्सा था।

आप सुनिए डिवाइन पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल विकास गुसाईं का बयान –

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कोरोना की मार से कराहने लगीं हूरें और उनके खुशामदी!

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दुनिया के सबसे पुराने पेशे के लिए भी कम विलेन नहीं यह नया कोरोना

शकुन रघुवंशी
फरीदाबाद। जिस्मफरोशी को दुनिया का पहला धंधा कहा जाता है। कोई कुछ भी कहे लेकिन गंदा होने के बावजूद यह धंधा है और खूब फलता फूलता धंधा है। इस धंधे को सेवा उद्योग की श्रेणी में रखा जाए तो बुरा भी नहीं मानना चाहिए। बेशक सरकारें गाहे बगाहे उनको नाचने गाने के नाम पर लाइसेंस पहले भी देती रही हैं, यह जानते हुए कि यहां पर नाचने गाने के अलावा बहुत कुछ होगा ही।
इस धंधे में जो सेवा देती हैं न, वो सेवा लेने वालों के लिए किन्हीं हूरों, परियों या अप्सराओं से कम नहीं हैं। बेशक उन्हें समाज में इज्जत की नजरों से नहीं देखा जाता है। इसीलिए उन्हें अपनी पहचान छुपा कर यह धंधा करना पड़ता है। और हां, उनकी सर्विस फिक्स करने वालों को दलाल या पिम्प कहा जाता है। डीलर नहीं कहा जाता है, अन्य धंधों की तरह। मैं उन्हें खुशामदी ही कहना चाहूंगा क्योंकि खुशामद से ही इनका घर चलता है।

फिल्मी लगती है लोगों को रोगमुक्त कराने वाले डाक्टर की कहानी

जानकार बता रहे हैं कि इनका धंधा लगभग बंद पड़ा है। इस कोरोना लॉकडाउन काल में यह हूरें और उनके खुशामदी कराहने लगे हैं। क्यों? क्योंकि धंधा ठप सा हो गया है। यदि आप सोच रहे हैं कि इसके पीछे लॉकडाउन या आवाजाही में रोड़ा अटकाने वाले बेरिकेट्स कारण होंगे तो आप अपनी गलत फहमी को जितना जल्द दूर करेंगे उतना अच्छा होगा।
इसके पीछे कारण हैं पीएम नरेंद्र मोदी। उन्होंने ही तो कहा है कि -जान है तो जहान है। मतलब जिंदा बचोगे तो ही इस दुनिया को देख पाओगे। बेशक कुछ लोगों को मरने के बाद हूरें, अप्सराएं चाहिए। लेकिन इन हूरों को तो जीते जी जहान चाहिए
हालात यह है कि जो खुशामदी व्हाट्सऐप पर हूरों के फोटो भेजता था, वो भी आज कस्टमर को जवाब नहीं दे रहा है। हालात यह हैं कि उन्होंने कोठियां (जहां हूरें रहती हैं) खाली करना शुरू कर दिया है।

डिजिटली ट्रेंड अभिभावक करेंगे परंपरागत ट्यूशन को रिप्लेस

बेशक इस मंदी और लॉकडाउन के कोरोना काल में बची खुची या फंसी हूरों, मैडम और खुशामदियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद कस्टमर को कोठी पर ही दावत के लिए बुला लेते हैं।
समझ रहे हैं न, उन्हीं कस्टमर को जिनकी फेसवैल्यू है। लेकिन इस फैसवैल्यू वाले कस्टमर को अब रेट भी ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं।
वो इकनॉमी का सिद्धांत है न डिमांड एंड सप्लाई वाला। हां, वही लागू हो गया है। सर्विस की कीमत बढ़ गई है। ठीक वैसे ही, जैसे आजकल तस्करी की शराब तीन गुने रेट पर बिक रही है। शराब की लॉबी बेशक सरकार पर ठेके खोलने का दबाव बना रही हो और सरकार भी खर्चे पूरे न होने की भूमिका जमा चुकी हो।
लेकिन यह हूरें लॉबिंग के लिए तैयार नहीं हैं। क्योंकि इन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग का निर्णय खुद लिया है क्योंकि जान है तो जहान है। वैसे भी इन हूरों ने इस जरायम पेशे को इसलिए स्वीकार किया था क्योंकि इन्हें जीते जी जहान चाहिए।

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डिजिटली ट्रेंड अभिभावक करेंगे परंपरागत ट्यूशन को रिप्लेस

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ऑनलाइन माध्यमों के जरिए पढ़ाई की संभावना को लगेगा गियर

शकुन रघुवंशी
फरीदाबाद। स्कूलों से शुरू हुआ ऑनलाइन क्लासेस का जायका यदि अभिभावकों की जुबान पर चढ़ा तो परंपरागत ट्यूशन उद्योग के सामने बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा हो सकता है। आपको याद है न मोबाइल आने के बाद एसटीडी बूथ कैसे गायब हो गए थे।
अभी तक अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में डिजिटल क्लासेस केवल अभिभावकों को लुभाने का जरिया होती थीं। लेकिन लॉकडाउन के बाद यह स्कूलों के लिए आवश्यकता हो गई हैं। इस समय अधिकांश स्कूल ऑनलाइन माध्यमों से अपने स्टूडेंट को स्टड़ी मैटीरियल उपलब्ध करवा रहे हैं वहीं अभिभावक भी बच्चों के साथ इस काम में सहायक बने हुए हैं। इस दौरान अभिभवकों को पता चला कि ऑनलाइन ऐसा बहुत कुछ उपलब्ध है जिसके बारे में उन्होंने पहले देखा सुना तक नहीं था। आज ऐसे अनेक ऑनलाइन माध्यम उपलब्ध हैं जिनके जरिए उनके बच्चे घर बैठे ट्यूशन पढ़ सकते हैं।

सतबीर शर्मा

अभिभावक सतबीर शर्मा का कहना है कि आज बच्चों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है।

रोहित सिंगला

यदि पैरेंट्स किसी ऑनलाइन ट्यूशन माध्यम को चुनें तो उनका बच्चा घर में रहकर पढ़ाई करेगा, जिससे उनकी अनेक चिंताएं खत्म हो जाएंगी। वहीं दूसरी ओर ट्यूशन सेंटर तक आने जाने की बच्चे की मेहनत भी बचेगी। ऐसे में हम उन्हें खेलने के लिए अधिक समय भी दे सकते हैं।
वहीं पूर्व पार्षद रोहित सिंगला का कहना है कि डिजिटली टें्रेड अभिभावकों के लिए ऑनलाइन ट्यूशन वरदान हो सकते हैं। सिंगला के अनुसार जब बच्चे ट्यूशन जाते हैं तो उनकी सांसें बढ़ी रहती हैं। लेकिन ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाला ट्यूशन उनके बच्चों को घर पर समाधान दे सके तो यह बहुत अच्छा हो सकता है। हालांकि वह यह भी मानते हैं कि इसके लिए पैरेंट्स को डिजिटली टें्रड होने के साथ साथ छोटे बच्चों पर ज्यादा समय लगाना पड़ेगा।

के एल खुराना

डीएवी स्कूल्स के पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी के एल खुराना का कहना है कि समय प्रतिदिन बदलता है।

इस बदलाव को खुलकर स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्यूशन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की ट्यूशन देने की प्रवृत्ति पर रोक लगा सकता है, जिसके अच्छे नतीजे सामने आ सकते हैं।

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