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बचल खुचल

सूखी खाँसी से कैसे पाएँ छुटकारा?

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sukhi khasi

यदि आप सभी को भी यह सूखी खाँसी की समस्या है तो यह घरेलू उपाय जरूर अपनाएं-

 गर्म पानी के गरारे:
खांसी और उससे होने वाली गले की तकलीफों से निज़ाद पाने का सबसे  सबसे आसान नुस्खा है गरम पानी के गरारे। सुबह और शाम एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक मिला कर अच्छे से गरारे करने से गले में कष्ट देने वाले कीटाणुओं का नाश हो जाता है और गले को आराम मिलता है।

 तुलसी का काढ़ा:
तुलसी एक बहुमूल्य हर्बल प्लांट है। कहा जाता है की तुलसी खांसी ज़ुकाम और मौसमी बुखार आदि में बहुत उपयोगी होती है। 8 -10 तुलसी से पत्तों को धो कर एक ग्लॉस साफ पानी में तब तक उबालें जब तक की पानी आधा न रह जाये, अब इसे कप में छान कर इसमें शहद मिला कर घूंट घूंट पियें, इससे गले को बहुत आराम मिलता है। सुखी खांसी का कष्ट दूर हो जाता है और इसका कोई भी साइड इफ्फेक्ट नहीं है।

 अदरक:

करीब एक इंच अदरक को कूट कर एक गिलास पानी में पानी आधा रहने तक उबाल लें, फिर शहद मिला कर घूंट घूंट कर पिएं।

अदरक को पीस कर साफ़ कपडे लें और कटोरी में इस रस को इकक्ठा कर के इसमें शहद मिला कर रख लें। अब इसे थोड़ी थोड़ी देर में चाटते रहे। इससे गले की खुश्की को नमी मिलती है और अदरक का रास खांसी में कमी लाता है।

अदरक तासीर में गरम होती है इसलिए ठण्ड से लगी खांसी  में बहुत आराम मिलता है। गले की खींच खींच में भी आराम मिलता है और शरीर में गर्मी बनाये रख़ता है।

 हल्दी:
 हल्दी में बहुत सरे औषधिक गुण होते हैं, ये एंटीसेप्टिक का खज़ाना है इसके सेवन से चेस्ट के इन्फेक्शन में बहुत आराम आता है और खांसी कम होते होते पूरी तरह ख़तम तक हो जाती है।

रात को सोने से पहले गरम दूध में चौथाई चम्मच हल्दी और स्वाद अनुसार चीनी मिला कर पी लें और फिर बहार हवा में न घूमें बस सो जाएं।
दूसरा तरीके में एक कप पानी में एक छोटा चम्मच हल्दी उबालें इसमें चौथाई चम्मच काली मिर्च और एक चुटकी दालचीनी पाउडर मिलाएं कप में परोस कर एक चम्मच शहद के साथ घूंट घूंट कर के पियें।

 नींबू:
 निम्बू विटामिन C का बहुत अच्छा स्त्रोत है और विटामिन C खांसी के इलाज का बहुत अच्छा साबित होता है।

 2 चम्मच नींबू के रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में चार बार लेने से गले की खराश दूर हो जाती है और सूखी खांसी से भी राहत मिलती है।

 लहसुन:
लहसुन में एक प्रकार का एंटीबैक्टीरियल पदार्थ रहता है जो गले के सभी कष्ट तुरंत ही गायब करने में मदद करता है।

एक कप पानी में दो या तीन लहसुन की कलियों को उबालें, हल्का ठंडा होने पर इसमें शहद मिला कर घूंट घूंट पीने से सूखी खांसी में बहुत आराम मिलता है।

प्याज:

आधा चम्मच प्याज के रस में एक छोटा चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने से सुखी खांसी झट से गायब हो जाती है।

पीपल की गांठ
पीपल की गांठ को भी सूखी खांसी में लाभकारी माना गया है। यह एक आजमाया हुआ नुस्खा है, जिससे सूखी खांसी को ठीक करने में मदद मिली है। इसके लिए एक पीपल की गांठ को पीस लें और उसे एक चम्मच शहद में मिलाकर खा लें। रोजाना ऐसा ही करें। इससे कुछ ही दिन में सूखी खांसी ठीक हो जाएगी।

मुलेठी की चाय
मुलेठी का चाय पीने से भी सूखी खांसी में आराम मिलता है। इसे बनाने के लिए, दो बड़ी चम्मच मुलैठी की सूखी जड़ को एक मग में रखें और इस मग में उबलता हुआ पानी डालें। 10-15 मिनट तक भाप लगने दे। दिन में दो बार इसे लें।

 इसके अलावा भाप लेने से भी काफी फायदा होता है। इसके लिए गरम पानी लें और अपने सिर पर एक तौलिया डालकर गरम पानी के ऊपर मुंह ले जाकर भाप लें।

बचल खुचल

जिज्ञासु ने किताब में दर्द जमा किए हैं – रणबीर सिंह

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दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ रणबीर सिंह ने किया पूर्व आयकर अधिकारी के काव्य का विमोचन

फरीदाबाद।
काव्य जीवन जलधि के मोती वास्तव में जीवन के दर्दों का संग्रह है। जो हमारा ध्यान बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है। यह सभी को अवश्य ही पढऩी चाहिए। यह बात दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ रणबीर सिंह ने कही। वह यहां होटल राजहंस में पूर्व आयकर अधिकारी हुकम सिंह दहिया जिज्ञासु के काव्य का विमोचन करने पहुंचे थे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री सिंह ने युवाओं से अपील की कि बेशक आज आपके पास अनेक साधन मौजूद हों लेकिन आप साहित्य अवश्य ही पढें। यह जीवन सिखाते हैं। श्री सिंह ने कहा कि इस पुस्तक को चार प्रमुख भागों में बांटा गया है, जिनमें लेखक की फिक्र, सोच, अहसास और इरादे साफ साफ नजर आते हैं। यह पुस्तक हमें एक उम्मीद बांधती है कि हम अपनी रोशनी खुद बन सकते हैं। इसमें एक बेहतर भविष्य की रचना की गई है, जिसमें पुराने बंधन दिखाई नहीं देते। वास्तव में पुस्तक में संग्रहित लेखक के मसले आज सबके मसले हैं। बता दें कि श्री सिंह लेखक के भतीजे भी लगते हैं। इसलिए वह पूरे संबोधन में लेखक को चाचा ही बोलते रहे। उन्होंने चाचा भतीजे की नजदीकियों का भी जिक्र किया।


पुस्तक की समीक्षा मशहूर शायर एवं कवि ज्योति संग ने की। उन्होंने कहा कि जिज्ञासु ने पुस्तक में भावनाओं और संवेदनाओं को संयोजित किया है। उन्होंने पुस्तक को महाकाव्य कहे जाने की संस्तुति की। अधिवक्ता आर के मल्होत्रा ने कहा कि लेखक मेरे मित्र हैं, लेकिन आज उनकी रचना को पढक़र मैं उनके प्रति और संवेदनशील हो गया हूं। उन्होंने पुस्तक में मन, ईश्वर और प्रकृति के बारे में अपनी राय लिखी है जो आज के समय में बेहद जरूरी है।
लेखक हुकम सिंह दहिया जिज्ञासु ने काव्य की अपनी कुछ चुनिंदा पंक्तियों को गाकर प्रस्तुत किया। जिसे सभी ने सराहा। उन्होंने बताया कि उनकी पुस्तक अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध है। कार्यक्रम में कवि राजेश खुशदिल और कवि एस एन भारद्वाज ने भी अपनी रचनाओं से लोगों की वाहवाही लूटी। वहीं संचालन कवि श्रीचंद भंवर ने व संयोजन लेखक के पुत्र एवं गुजरात कैडर के आईएएस अजय दहिया ने किया।
इस अवसर पर पूर्व आयकर अधिकारी रामदत्त शर्मा, डीडीए के पूर्व उपनिदेशक प्रेम सिंह दहिया, कर्मचंद आदि प्रमुख व्यक्ति मौजूद रहे।

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बचल खुचल

उन्होंने बचपन में ही कह दिया था इन अंग्रेजों की किताब तो बिलकुल नहीं पढ़ूँगा

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पूरा विश्व 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को मनाता है| “स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्र निर्माण और सार्वभौमिक भाईचारे के प्रति युवा शक्ति को बहुत महत्व दिया था। भारत के महान आध्यात्मिक और सामाजिक नेताओं में से एक, स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को सम्मानित करने के लिए12 जनवरी को चुना गया था। इस दिन देश भर में जगह जगह  परेड, खेल कार्यक्रम, संगीत, सम्मेलन, स्वयंसेवक परियोजनाओं, और युवा उपलब्धियों के प्रदर्शनों जैसे कार्यक्रम किये जाते हैं| स्वामी विवेकानंद भारत के एक हिंदू  भिक्षु थे। स्वामी जी ने 19 वीं और 20 वीं शताब्दी के बढ़ते भारतीय राष्ट्रवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, हिंदू धर्म के कुछ पहलुओं को फिर से परिभाषित और सामंजस्यपूर्ण बनाया। उनकी शिक्षाओं और दर्शन ने इस पुनर्व्याख्या को शिक्षा, विश्वास, चरित्र निर्माण के साथ-साथ भारत से संबंधित सामाजिक मुद्दों पर लागू किया था| स्वामी जी ने पश्चिम में योग को शुरू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | विवेकानंद के अनुसार एक देश का भविष्य उसके लोगों पर निर्भर करता है|

जिसमें कहा गया है कि “मानव-निर्माण मेरा मिशन है।”  धर्म इस मानव-निर्माण में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है, जिसमें “मानव जाति को अपनी दिव्यता का प्रचार करने के लिए, और इसे जीवन के हर आंदोलन में कैसे प्रकट किया जाए|

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बचल खुचल

क्यों मनाई जाती हैं ज्योतिराव फुले की जयंती?

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२8 नवंबर को 19वीं सदी के हमारे एक भारतीय महान विचारक, समाज सेवी, लेखक ज्योति गोविंदराव फुले की जयंती मनाई जाती है। इन्हें एक महान समाज सुधारक कहा जाता है क्योंकि फुले ने सदैव महिलाओं व दलितों के उत्थान के लिए कार्य किए थे। इनके जीवन में कुछ मुख्य उद्धेश्य थे। जैसे समाज के सभी वर्गाें को शिक्षा प्रदान करवाना, जाति पर आधारित विभाजन और होने वाले भेदभाव के विरूद्ध आवाज उठाना।
इनका पूरा जीवन स्त्रियों को शिक्षा प्रदान करवाने, बाल विवाह के विरूद्ध, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में, विधवा विवाह का सर्मथन करने में व्यतीत हो गया। फुले समाज को कुप्रथा, अंधश्रद्धा की जाल से समाज को मुक्त करना चाहते थे। इसलिए ज्योतिराव फुले ने सभी कार्य महिलाओं के हित में किए। वह महिलाओं को स्त्री-पुरूष भेदभाव से बचाना चाहते थे।
जब 19वीं सदी में स्त्रियों को शिक्षा नहीं दी जाती थी। उस समय उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि वह समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाकर रहेंगे। इसलिए उन्होंने कन्याओं के लिए भारत देश की पहली पाठशाला पुणे मे बनवाई।
सर्वप्रथम बदलाव स्वंय फुले के घर में देखने को मिला। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले को स्वंय शिक्षा पदान की थी और वह भारत की प्रथम महिला अध्यिापिका बनी थी।
फुले ने अपने दौर में धर्म समाज, परपराओं के सत्य को सामने लाने के लिए गुलामगिरी, तृतीय रत्न, किसान का कोड़ा, अछुतों की कैफियत फयत, राजा भोसला का पखड़ा नामक कई पुस्तकें लिखी।
फुले तथ उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने एग्रीकल्चर एक्ट पास किया था। अंतिम यात्रा से पहले फुले ने भारत में सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी| 28 नवंबर 1890 को ज्योतिराव फुले ने धरती पर अंतिम सांसे ली।

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