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रूह-ब-रूह

22000 महिलाओं की तकदीर बदल दी रूमा ने

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ruma devi

बाड़मेर। रूमा देवी ने 22000 महिलाओं की ज़िन्दगी बदल कर रख दी है| बेइंतहा गरीबी में पली-बढ़ी, बाल विवाह का दंश झेल चुकी रूमा देवी बाड़मेर से हैं लेकिन आज दुनिया में पहचान बना चुकी हैं|
रूमा देवी राजस्थान के बाड़मेर जिले की रहने वाली हैं। राजस्थानी हस्तशिल्प जैसे साड़ी, बेडशीट, कुर्ता समेत अन्य कपड़े तैयार करने में इनको महारत हासिल है। इनके बनाए गए कपड़ों के ब्रांड विदेशों में भी फेमस हैं।वर्तमान में रूमा देवी भले ही हजारों महिलाओं का जीवन सँवार रही हों, मगर इनके खुद के जीवन की शुरुआत ही संघर्ष से हुई। बाड़मेर जिले के गांव रातवसर में खेताराम व इमरती देवी के घर नवम्बर 1988 में रूमा देवी का जन्म हुआ।
पांच साल की उम्र में रूमा ने अपनी मां को खो दिया। फिर पिता ने दूसरी शादी कर ली। 7 बहन व एक भाई में रूमा देवी सबसे बड़ी हैं। पानी रूमा देवी अपने चाचा के पास रहकर पली-बढ़ी। गांव के सरकारी स्कूल से महज आठवीं कक्षा तक पढ़ पाई।

गौरतलब है कि राजस्थान में पेयजल की सबसे अधिक किल्लत बाड़मेर है। यहां भूजल स्तर पाताल की राह पकड़ चुका है। ऐसे में रूमा ने वो दिन भी देखें जब इन्हें बैलगाड़ी पर बैठकर घर से 10 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता था।
बाड़मेर में 1998 में ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान बाड़मेर (जीवीसीएस) नाम से एनजीओ बना, जिसका मकसद था राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना। वर्ष 2008 में रूमा देवी भी इससे संस्थान से जुड़ी और जमकर मेहनत की। हस्तशिल्प उत्पादों के नए नए डिजाइन तैयार किए। वर्ष 2010 में इन्हें इस एनजीओ की कमान सौंप दी गई। अध्यक्ष बना दिया गया।
रूमा देवी को ‘नारी शक्ति पुरस्कार 2018’ से सम्मानित किया जा चुका है। 15 व 16 फरवरी 2020 को अमेरिका में आयोजित दो दिवसीय हावर्ड इंडिया कांफ्रेस में रूमा देवी को भी बुलाया गया था। तब इन्हें वहां अपने हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित करने के साथ-साथ हावर्ड यूनिवर्सिटी के बच्चों को पढ़ाने का मौका भी मिला। इसके अलावा रूमा देवी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर भी नजर आ चुकी हैं।
इनके फेसबुक पेज को 1 लाख 64 हजार लोगों ने लाइक कर रखा है। ट्विटर पर इन्हें 6 हजार 500 लोग फॉलो करते हैं। सोशल मीडिया पर रूमा देवी अपने हस्तशिल्प उत्पादों के बारे में अक्सर बताती रहती हैं। हौसले का हुनर रूमा देवी पर हाल ही किताब भी लिखी गई है, जिसका नाम ‘हौसले का हुनर’ है।

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समाज का दुःख दूर करने में जुटे गुरचरन राजू

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सिद्धि वर्मा 

आमतौर पर उद्यमियों को समाजसेवी के बजाय सेलिब्रिटी माना जाता है लेकिन राजू ने इस बात को जैसे उलट दिया है|हम बात कर रहे हैं कांग्रेस नेता गुरचरन सिंह राजू की|
राजू दिल्ली के जिला कृष्णा नगर कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हैं और पूर्व में निगम पार्षद भी रहे हैं| अपने दिल में समाज के प्रति गहरी भावना लिए राजू का दिन समाज में ही बीतता है|उनके समर्थक कहते हैं कि आज के समय में ऐसे सरल व्यक्तिओं का मिलना बहुत ही मुश्किल है|

           गुरुचरण सिंह राजू

राजू का जन्म 16 जून 1965 को दिल्ली के प्रीत विहार में हुआ और आज भी वह उसी इलाके में रहते हैं| राजू के पिता स्वर्गीय सरूप सिंह भी कांग्रेस के नेता और स्वतंत्रता सैनानी रहे थे|
राजू कहते हैं कि समाज में अच्छाई और बुराई हमेशा से रही है लेकिन हमें बुराइयों के सामने सच्चाई और अच्छाई को मजबूती से खड़ा करना आता है| राजू अपने पिता के नक़्शे कदम पर चलते हुए एक जागरूक समाजिक व्यक्ति ही बने रहना चाहते हैं|
राजू ने लोक सभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी के लिए 30 साल से भी अधिक तक कैंपेन चलाये हैं| वह पिछले 30 साल से लायंस क्लब दिल्ली, रोटरी क्लब, स्थानीय RWA के एक्टिव सदस्य हैं| वह अब तक ज़रूरतमंद लोगों के लिए 60 से अधिक फ्री हेल्थ चेकअप  कैंप, ब्लड शुगर कैंप लगवा चुके हैं| पिछले 20 साल से गरीब, ज़रूरतमंद लोगों के लिए सर्दियों के कपड़े, कंबल बाँटते हैं| उन्होने बहुत सारे रिलीफ कैंप जैसे बाढ़, भूकंप से पीड़ित, जख्मी होने वाले लोगों के लिए करवाए| फिलहाल वह गुरुद्वारा श्री सिंह सभा प्रचार समिति के प्रेजिडेंट हैं|  अब तक यह अमेरिका,लंदन, स्विट्ज़रलैंड, सिंगापुर, थाईलैंड, भूटान, ऑस्ट्रेलिया, दुबई, साउथ अफ़्रीका, मलेशिया, पाकिस्तान आदि देशों का भ्रमण कर चुके राजू का दिल अपने क्षेत्र में ही लगता है| वर्ष 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में विश्वास नगर से कांग्रेस प्रत्याशी रहे राजू के चुनाव में थोड़ी कसर रह गयी| उनके समर्थक कहते हैं नेताजी तो कृष्णा नगर से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन एन वक्त उनको विश्वास नगर से खड़ा कर दिया, जबकि हमारी तयारी कृष्णा नगर से थी| समर्थक कहते हैं कि अगली बार सारी कसर निकाल देंगे|

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रूह-ब-रूह

फिल्मी लगती है लोगों को रोगमुक्त कराने वाले डाक्टर की कहानी

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फरीदाबाद की ग्रीनफील्ड कॉलोनी में रहने वाले डॉ. बीके चंद्रशेखर की कहानी पूरी फिल्मी लगती है, लेकिन यह एक फौजी के जुनून और परमात्मा के अनुग्रह का ऐसा मिश्रण है| जो आज हजारों अन्य को रोगमुक्ति दिला रहा है। मूल रूप से बिहार के रहने वाले चंद्रशेखर वर्ष 1998 में गोरखपुर एयरबेस में तैनात थे, जब उनको कैंसर ने आ जकड़ा। वर्ष 1999 में वह दिल्ली के आर्मी अस्पताल में कैंसर का ऑपरेशन करवाने के लिए पहुंचे। कैंसर का ऑपरेशन हुआ लेकिन गलत। दूषित खून के कारण उन्हें हेपेटाइटिस सी नामक रोग भी हो गया। दोबारा ऑपरेशन हुआ। आगे के इलाज के लिए उन्हें पूना कमांड हास्पिटल में भेजा गया। इसी दौरान चंद्रशेखर स्टेज 4 ग्रेड 4 लीवर सोराससिस रोग की चपेट में आ गए। मेडिकल साइंस के अनुसार यह बीमारी लाइलाज थी। कीमो के साइड इफेक्ट से प्रभावित हो रहे चंद्रशेखर सहित उनके परिवार को लगता कि जैसे सारी आफत उन्हीं पर आ पड़ी है और अब वह बचेंगे नहीं।

विवादों के बावजूद… अरविंद केजरीवाल

परमात्मा में आस्थावान चंद्रशेखर के एक दोस्त ने पूछा, कहां है तुम्हारा भगवान। इसके बाद वह परमात्मा में आस्था खो बैठे और गतिहीन हो गए। वह बताते हैं कि उन्हें एक चमकता प्रकाश नजर आया, जो उनसे संवाद कर रहा था। उस समय वह तय नहीं कर पा रहे थे कि यह सपना है या सच। प्रकाश कहता है तुम्हें कुछ नहीं होगा, और तुम ईश्वरीय सेवाओं का प्रयोग कर विश्व को प्रबुद्ध बनाओगे। इसके बाद उनका प्रकाश के साथ संवाद कायम हो गया। वह जो बात कहे, उसे वह बात में लिखते और स्वयं पर आजमाते। धीरे धीरे वह सभी रोगों से मुक्त हो गए और जो उनके पास लिखा हुआ था वह एक किताब इनबिसिबल डाक्टर प्रकाशित की, जो बहुत लोकप्रिय हुई। इसके बाद उन्होंने आपका स्वास्थ्य आपके हाथ, इनक्रीज योर मेमोरी नामक किताबें लिखीं और मेमोरी डेवलपमेंट कोर्स विकसित किया। चंद्रशेखर ने यह सब प्रकाश से प्राप्त जानकारी के आधार पर किया। उन्होंने इस प्रकाश को स्प्रिचुअल लाइट इनकॉरपोरियल गॉड फादर अलमाइटी यानि सिग्फा नाम दिया।

इन चीज़ों के सेवन से सर्दियों में रहेंगे हेल्दी

सिग्फा ज्ञान को फैलाने के लिए उन्होंने 2008 में एयरफोर्स की नौकरी छोडक़र सिग्फा सॉल्यूशंस नाम की एनजीओ स्थापित की और इसके अंतर्गत साइको न्यूरोबिक्स नामक कोर्स विकसित किया। इस कोर्स को तमिलनाडू फिजिकल एडुकेशन एंड स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी चैन्नै, वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी राजस्थान, उत्तराखंड यूनिवर्सिटी हल्द्वानी, बैंगकॉक की रैंगसित यूनिवर्सिटी, अमेरिका के शहर फ्लोरिडा स्थित योगा संस्कृतम विश्वविद्यालयों ने बीएससी (साइको न्यूरोबिक्स) और एमएससी (साइको न्यूरोबिक्स) के रूप में मान्यता दी है। अब तक इस कोर्स को हजारों डाक्टर, इंजीनियर व छात्र कर चुके हैं। चंद्रशेखर एक साथ 1864 एमबीए छात्रों को लेक्चर देकर गिन्नीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड भी बना चुके हैं। चंद्रशेखर की जीवन की दास्तां किसी फीनिक्स पक्षी के जैसी है जिसके बारे में कहा जाता है कि वह मरने के बाद जलकर भी राख से जी उठता है। उन्होंने अपने ज्ञान के जरिए एक महिला डाक्टर का मल्टीपल माइलोमा कैंसर ठीक किया। चंद्रशेखर कहते हैं कि वह ईश्वरीय ज्ञान एवं कृपा से ठीक हुए हैं, जिसको वह अब दूसरों में बांट रहे हैं। वह आज विश्वविख्यात साइको न्यूरोबिक्स विशेषज्ञ हैं, जो अपनी पत्नी और एक बेटी के  साथ प्रसन्नता से जीवन जी रहे हैं और दूसरों को खुशियां बांट रहे हैं।

क्या आप भी जोड़ों में दर्द और सूजन से परेशान हैं?

 

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विवादों के बावजूद… अरविंद केजरीवाल

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16 अगस्त 1968 में हरियाणा जिले के सिवानी में जन्मे अरविन्द केजरीवाल तात्कालिक भारतीय राजनीति में वह नाम है जो अक्सर किसी न किसी विवाद में उलझे रहते हैं| अरविंद केजरीवाल जाति से वैश्य और पेशे से दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं| केजरीवाल के पिता का नाम गोविंद राम केजरीवाल तथा माता का नाम गीता देवी है| हरियाणा में जन्में अरविन्द केजरीवाल एक मध्यम वर्गीय परिवार से सम्बंध रखते है इनके पिता जी एक इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर हैं| केजरीवाल अपने तीन भाई बहनों में सबसे बड़े हैं| इन्होने सन 1994 में सुनीता से शादी की इनके एक बेटा और एक बेटी हैं| इनका अधिकांश बचपन उत्तर भारत के शहरों में गुजरा|

केजरीवाल ने अपनी स्कूली शिक्षा हिसार से पूरी करने के बाद आईआईटी खड़गपुर से स्नातक की डिग्री हासिल की इसके बाद upsc में अपनी सफलता दर्ज की और आईआरएस अधिकारी के रूप में कार्य करने में जुट गए और अफसरी करते हुए राजनीति की गहराई को समझ गए| सामाजिक मुद्दों पर ध्यान देते हुए केजरीवाल ने 2006 में आयकर विभाग के जॉइंट कमिश्नर पद से इस्तीफा दे दिया| इस इस्तीफे के बाद लगातार वे समाजिक मुद्दों से जुड़े रहे इन्होने अन्ना के आंदोलन में भाग लिया और अपनी पार्टी बनाई नवंबर 2012 में आदमी पार्टी की नींव रखी|

2012 में दिल्ली के रामलीला मैदान में समाजसेवी अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान मंच का संचालन करने वाले अरविंद केजरीवाल के विचारों से आम आदमी पार्टी का गठन किया तब केजरीवाल और उनके सहयोगियों ने देश की राजनीति से अलग विचारधारा और साफ-सुथरी राजनीति की बात कही थी| मगर अन्ना को राजनीतिक पार्टी बनाने पर ऐतराज था उनका मानना था कि राजनीति दलदल है जिसमें केवल बेइमानी और भ्रष्टाचार है| मगर अन्ना के इस विरोध के बावजूद अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों ने आम आदमी पार्टी का गठन किया| तब अरविंद का साथ देने वालों में शांति भूषण, प्रशांत भूषण, मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, शाजिया इल्मी, किरण बेदी जैसे लोग शामिल थे| मगर वक्त बीतने के साथ उनमें से ज्यादातर अब इस पार्टी के हिस्सा नहीं हैं| वहीं 2015 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कुछ ऐसे फैसले लिए जिनसे उनमें वैकल्पिक राजनीति की उम्मीद देख रहे लोगों का विश्वास डगमगाने लगा|

सत्ता में आने के बाद केजरीवाल ने मार्च 2015 में सबसे पहले योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को आम आदमी पार्टी की ‘पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी’ से बाहर कर दिया| योगेंद्र-प्रशांत के निकाले जाने के बाद कुछ लोगों को यह भी लगा कि जैसे दूसरी पार्टियों के नेताओं में अपने शीर्ष नेता की चापलूसी की होड़ रहती है शायद वैसा ही कुछ अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी में भी चाहते हैं| अरविन्द केजरीवाल ने जब से राजनीति में कदम रखा है तब से ही विवाद के घेरे में आते रहे हैं| इनके ऊपर कई नेताओं के कई धाराओं के मुकदमें भी दर्ज है|

अरविन्द केजरीवाल ने जब आम आदमी पार्टी बनाई तब इनके साथी प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने भी इनका साथ दिया लेकिन कुछ समय पश्चात इनके बीच रिश्ते ख़राब होते चले गए और कई बार तो अरविन्द केजरीवाल इन्हें गलियां देते नज़र आए| केजरीवाल पर ये आरोप भी है की उन्होंने कई लोगों को अपनी पार्टी से टिकट दी है जिनके पास फ़र्ज़ी डिग्रियां है और कई बार उन्ही के पार्टी के लोग उन पर आरोप लगते हैं की केजरीवाल अपनी पार्टी को लोकतान्त्रिक तरीके के बिना अपनी मर्ज़ी से चलते हैं|

वहीं दिल्ली के मुख्यमत्री होने बावजूद दिल्ली  पुलिस और केजरीवाल के बीच तनाव बना रहता इन्होने अपने एक इंटरव्यू में दिल्ली पुलिस को ठुल्ला भी कहा था| इन सबके अलावा अगर राजनीतिक दांव पेंच की बात करें तो सत्ता में आने के बाद से केजरीवाल इसमें भी नौसिखए से नजर आते हैं उदहारण के तोर पर सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे पर दिया गया उनका बयान हो या एमसीडी चुनाव में ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ को अपनी हार की वजह बताना हो ऐसे ज्यादातर मौकों पर उनका दांव उल्टा ही पड़ा है|

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