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सोलर बिजली बनाओ, वरना रहोगे अँधेरे में

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फरीदाबाद डेस्क|

हरियाणा सरकार ने सभी नए बनने वाले सरकारी या निजी हस्पताल, स्कूल, कॉलेज, मॉल, नर्सिंग होम, इत्यादि के लिए सोलर बिजली का इस्तेमाल करना जरुरी कर दिया है| निजी क्षेत्र में नयी इमारतों के लिए यह अधिसूचना, हरियाणा बिल्डिंग कोड 2016 के जारी होने की तिथि 30 जून, 2016 से लागू होगी |

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस संबंध में जारी अधिसूचना के अनुसार नगर निगमों, नगर परिषदों, नगरपालिकाओं, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम के सैक्टरों की सीमा के भीतर आने वाले 500 वर्ग गज तथा इससे अधिक आकार के भूखण्ड पर निर्मित सभी नए आवासीय भवनों के लिए कम से कम एक किलोवाट अथवा सम्बद्घ भार का पांच प्रतिशत, जो भी अधिक हो, की क्षमता वाले सौर पैनल से बिजली बनाने वाले संयंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।

उन्होंने बताया कि 30 किलोवाट या अधिक सम्बद्घ भार वाले सभी नए निजी शैक्षणिक संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों, छात्रावासों, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों इत्यादि के लिए कम से कम पांच किलोवाट अथवा सम्बद्घ भार का पांच प्रतिशत, जो भी अधिक हो, की क्षमता वाले और 30 किलोवाट या अधिक सम्बद्घ भार वाले सभी सरकारी भवनों एवं कार्यालयों, सरकारी महाविद्यालयों, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों, सरकारी शैक्षणिक संस्थानों और महाविद्यालयों के लिए कम से कम दो किलोवाट अथवा सम्बद्घ भार का पांच प्रतिशत, जो भी अधिक हो, की क्षमता वाले सौर फोटोवोलटाईक विद्युत संयंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।

इसीप्रकार, सभी नए निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, मॉल, होटलों, मोटलों, समारोह हॉलों तथा पर्यटन परिसरों, जिनका सम्बद्घ भार 50 किलोवाट से 1000 किलोवाट हो, के लिए कम से कम 10 किलोवाट अथवा सम्बद्घ भार का पांच प्रतिशत, जो भी अधिक हो, की क्षमता वाले और 1000 किलोवाट से अधिक के सम्बद्घ भार के लिए कम से कम 50 किलोवाट अथवा सम्बद्घ भार का तीन प्रतिशत, जो भी अधिक हो, की क्षमता वाले सौर फोटोवोलटाईक विद्युत संयंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।  इसके अतिरिक्त, समूह आवासीय समितियों, बिल्डरों तथा आवास बोर्ड द्वारा 0.5 एकड़ से एक एकड़ के भूखंड पर विकसित सभी नए आवासीय परिसरों में कम से कम 10 किलोवाट, एक एकड़ से अधिक और दो एकड़ तक के सभी नए आवासीय परिसरों में कम से कम 20 किलोवाट, दो एकड़ से अधिक और पांच एकड़ तक के सभी नए आवासीय परिसरों में कम से कम 30 किलोवाट और पांच एकड़ से अधिक के सभी नए आवासीय परिसरों में कम से कम 40 किलोवाट क्षमता वाले सौर फोटोवोलटाईक विद्युत संयंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा। इसीप्रकार, सिंचाई विभाग के 100 किलोवाट एवं अधिक सम्बद्घ भार वाले सभी वाटर लिफ्टिंग स्टेशनों के लिए कम से कम 50 किलोवाट अथवा सम्बद्घ भार का तीन प्रतिशत, जो भी अधिक हो, की क्षमता वाले सौर फोटोवोलटाईक विद्युत संयंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।

उन्होंने बताया कि नगर एवं ग्राम आयोजना, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग सौर फोटोवोलटाईक विद्युत संयंत्रों की स्थापना के आज्ञापक प्रावधानों को क्रियान्वित करेंगे और सौर फोटोवोलटाईक विद्युत संयंत्रों का अनिवार्य उपयोग करने हेतु आदेश जारी होने की तिथि से तीन मास के भीतर अपने नियमों में आवश्यक प्रावधान करेंगे।  वे अपने विभाग के नियमों के अनुसार अधिसूचना को क्रियान्वित न करने पर दण्डनीय कार्यवाही, प्रक्रिया और जुर्माना राशि निर्धारित करते हुए दिशा-निर्देश भी जारी करेंगे।

उन्होंने बताया कि लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग, हरियाणा राज्य सडक़ एवं पुल विकास निगम, जन स्वास्थ्य, शिक्षा (सभी विभाग एवं मिशन परियोजनाएं), स्वास्थ्य(सभी विभाग एवं मिशन परियोजनाएं), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, रैडक्रॉस समितियां, वास्तुकला, आवास बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, सिंचाई, वन, पुलिस आवास निगम, पर्यटन, राज्य विश्वविद्यालय या सरकार का भवन निर्माण करने वाला अन्य विभाग अपने द्वारा निर्मित सभी भवनों में आज्ञापक प्रावधानों की अनुपालना के तहत सौर फोटोवोलटाईक विद्युत उत्पादन संयंत्रों को स्थापित करेंगे। अक्षय ऊर्जा विभाग, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम क्रियान्वित करने के लिए राज्य नामित अभिकरण के रूप में सरकारी विभागों या संगठनों को सौर विद्युत संयंत्र स्थापित करने में परियोजना प्रस्ताव, मूल्य अनुमान तैयार करने में तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार से समय-समय पर प्राप्त होने वाले केन्द्रीय वित्तीय सहायता (यदि उपलब्ध हो)को प्राप्त करने के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।

उन्होंने बताया कि सम्बन्धित विभाग राज्य सरकार के इस निर्णय को लागू करने की निगरानी तथा प्रगति रिपोर्ट अक्षय ऊर्जा विभाग को त्रैमासिक आधार पर अक्षय ऊर्जा  विभाग द्वारा जारी किये जाने वाले प्रपत्रों में सम्बन्धित अपर उपायुक्त-एवं-मुख्य परियोजना अधिकारी के माध्यम से भेजने के लिए जिला तथा राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी पदनामित करेंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर अक्षय ऊर्जा विभाग गुणवत्ता या तकनीकी आकलन करेगा। यदि इसे संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो सम्बन्धित विभाग नियमानुसार उक्त दाण्डिक कार्यवाही करेगा। ये संगठन/उपयोगकर्ता प्रवर्ग सम्बन्धित विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार महीने के भीतर अपने मूल्य पर निर्धारित प्रावधानों की अनुपालना सुनिश्चित करेंगे, जिसमें असफल होने पर सम्बन्धित विभाग द्वारा दण्डनीय कार्यवाही की जायेगी। स्थापित संयंत्र नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार या अक्षय ऊर्जा विभाग, हरियाणा या अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (हरेडा) द्वारा विहित तकनीकी विनिर्देशों का सख्ती से अनुपालना करेंगे। तकनीकी विनिर्देश अक्षय ऊर्जा विभाग की वेबसाईट www.hareda.gov.in से डाऊनलोड किए जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि निजी सेक्टर के उपयोगकर्ता प्रवर्ग या तो नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार या अक्षय ऊर्जा विभाग, हरियाणा या हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण द्वारा पैनल में शामिल चैनल पार्टनर्स/नये उपकरण /फर्म के माध्यम से सौर फोटोवोलटाइक ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं जबकि सरकारी विभाग या संगठनों के लिए  अक्षय ऊर्जा विभाग को राज्य नामित अभिकरण अनुमोदित किया गया है। पैनल में शामिल चैनल पार्टनर्स/नये उपकण/फर्म की सूची अक्षय ऊर्जा विभाग की वेबसाईट  www.hareda.gov.in  से ली जा सकती है। उन्होंने बताया कि निदेशक, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा स्थापित होने वाली अधिकतम क्षमता कम की जा सकती है जिसके लिए सम्बन्धित जिले के परियोजना अधिकारी द्वारा यह प्रमाणित किया जाना होगा की विशेष भवन पर अधिकतम विशेष किलोवाट का सोलर पावर प्लांट लग सकता है व भवन पर इससे अधिक छाया मुक्त स्थान उपलब्ध नहीं है।

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करोना से हार गए सुरों के बंधु विश्वबंधु

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फरीदाबाद| विजय रामलीला कमेटी के पूर्व चेयरमैन व निर्देशक विश्वबंधु शर्मा पंचतत्व में विलीन हो गए। वह पिछले 7 दिनों से फरीदाबाद एन.आई.टी. के ई.एस.आई अस्पताल के आई.सी.यू. में करोना से जंग लड़ रहे थे| लेकिन हरि इच्छा से बन्धु जी ने जंगलवार सुबह 7 बजे इस नश्वर शरीर को छोड़ दिया। विजय रामलीला कमेटी के महासचिव सौरभ कुमार ने बताया कि विश्वबन्धु जी तीन तीन घण्टे निरंतर रयास किया करते थे और घंटों एक ही स्थान पर बैठ कर रामायण के श्री सुंदरकांड का पाठ वो सालों से करते आ रहे थे|  जिस से उनके लंग्स बहुत स्ट्रांग थे इसलिए वेंटीलेटर पर जाने के बाद भी उन्होंने पूरे दम से ये लड़ाई लड़ी और 7 दिनों से वो इस दर्द को झेल रहे थे।  
विश्वबंधु जी पिछले 56 बरसों से विजय रामलीला कमेटी का अभिन्न अंग रहे हैं| कमेटी का कहना है कि विजय रामलीला का मंच उनकी आवाज़ के बिना अकल्पनीय है। उन्होंने राम और सीता का रोल करीब 30 बरस किया|  गन्धर्व महाविद्यालय से संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रामायण को संगीतमय ढंग से प्रदर्शित करने की दिव्य कला के वह स्वामी थे। संस्था में केशियर, महासचिव, निर्देशक से लेकर चेयरमैन पद तक सभी पर कार्यरत रह कर व समय समय पर अपनी सेवायें देते रहे हैं| कमेटी आज ऐसी महान आत्मा को शत शत नमन करती है और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के इस सेवक को उनकी शरण प्राप्ति हो, ऐसी कामना करती है।
विश्वबंधु जी से जुड़े रहे उनके पडोसी राजेश शर्मा ने बताया कि वह सभी के लिए सहयोगी थे| वह सभी के कार्यों में मदद करने पहुँच जाते थे| सेक्टर में वह एक पिता की भूमिका में दिखते थे| एक बार हमारे यहाँ जागरण में सुबह से लेकर अगले दिन सुबह तक एक आयोजक की तरह चिंता करते रहे| हमने एक बड़ी विरासत खो दी| 

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लिंग्याज ने बनाया क्रेडिट कार्ड साइज का कंप्यूटर

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बोइची-इन.वी नाम के कंप्यूटर के साथ रखा गैजेट्स की दुनिया में कदम

फरीदाबाद | शिक्षण संस्था लिंग्यास विद्यापीठ, डीम्ड-टू-बी- यूनिवर्सिटी ने एक बार फिर ऐसा कुछ कर दिखाया है कि लोग अचंभित हो रहे हैं| इस बार विद्यापीठ के प्रोफेसर ने क्रेडिट साइज जितना कंप्यूटर तैयार किया गया है। इससे कंप्यूटर की दुनिया में क्रांति आ सकती है|

डॉ. नंद ने बताया कि मेरे इस छोटे से कंप्यूटर के जरिए आप कोई भी काम कर सकते हैं और उस डाटा को सेव भी कर सकते है।

इनोवेटर प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार नेबताया कि इस कंप्यूटर को बनाने में पीसीबी(PCBप्रिंटिड सर्केट बोर्ड) बोर्ड का इस्तेमाल किया गया है। इसे बोइची-इन.वी (असम के एक फूल का नाम) का नाम दिया गया है। जो कम जगह और कम बिजली में चलेगा| इस छोटे कंप्यूटर को अपने घर के टीवी के साथ भी जोड़ा जा सकता है।उन्होंने बताया कि इसको बनाने में काफी समय लगा लेकिन अब यह सुखद अहसास दे रहा है| ये आकार मे छोटे जरूर हैं, लेकिन इसकी भंडारण क्षमता अधिक है।

लिंग्याज ग्रुप के चेयरमैन डा. पिचेश्वर गड्डे का कहना हैं कि डॉ. नंद के द्वारा बनाए गए इस इनोवेशन में उनकी मेहनत और समय दोनों नजर आता है। मुझे अच्छा लगता है कि लिंग्याज के पास डॉं नंद जैसे प्रोफेसर हैं।

क्या-क्या हैं इस कंप्यूटर में
इस छोटे कंप्यूटर को लिनक्स बेस्ड ऑप्रेटिंग सिसटम के साथ मिलकर रास्पबेरी पाई नामक सर्केट बोर्ड का इस्तेमाल कर इसे तैयार किया गया है। जिसमें 4 जीबी रैम, 16 जीबी एसडी मैमोरी कार्ड लगा हुआ है। इतना ही नहीं आप इसमें 64 जीबी तक का कार्ड भी लगा सकते हैं। इस पीसीबी बोर्ड में 2 एचडीएमआई (HDMI- हाई डेफिनेशन मल्टीमीडिया इंटरफेस ) माईक्रो पोर्ट लगे हुए हैं। जिससे इसकी हाई पिक्चर क्वालिटी देखी जा सकेगी। इस कंप्यूटर  में 4 यूएसबी पोर्ट है। जिसमें ऑडियो-विडियों, कैमरा, माइक्रो-फोन, हेड फोन भी अटैच किया जा सकता है। वहीं इंटरनेट की सुविधा के लिए ईथरनेट पोर्ट व वाई-फाई कनेक्शन जोड़ा गया है।इतना ही नहीं इसमें बच्चों के लिए गेम्स, पावर प्वाइंट व एक्सेल भी है।
क्या आए बदलाव
दुनिया का पहला सीपीयू(CPU) माइको प्रोसेसर बेस्ड  , 1970 के दशक में Intelद्वारा बनाया गया था। तब से लेकर अब तक इसके डिजाइन और इम्पलीमेंट में कई बदलाव आ चुके हैं। परन्तु इसके Fundamental Operation अर्थात काम करने के तरीके में ज्यादा बदलाव नहीं आया है।संगणन शक्ति (Computing Power) के संदर्भ में सीपीयू एक कंप्यूटर प्रणालीका सबसे महत्वपूर्ण तत्व (Important element)है। प्रोसेसर को महत्वपूर्ण बनाने में इसके कम्पोनन्ट का बहुत बड़ा योगदान है।

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सीटीओ एंजियोप्लास्टी स्टेंटिंग से बाईपास सर्जरी से बचाव संभव : डा. बंसल

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डा. बंसल ने बताया कि हृदय में क्रिटिकल ब्लॉकेज के कारण मरीज़ की हृदय के पंप करने की क्षमता बहुत धीमी हो गयी थी, जो केवल 30 प्रतिशत रह गई थी, जब हृदय में इस तरह के जटिल ब्लॉक होते हैं, तो मरीजों को अक्सर बाईपास सर्जरी के लिए कहा जाता है।

एसएसबी अस्पताल ने काम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी के जरिए मरीज को दिया नया जीवन
फरीदाबाद। चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणीय एसएसबी अस्पताल के डाक्टरों ने काम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी के जरिए मरीज को नया जीवन दिया है। मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे बाईपास सर्जरी की जरूरत थी परंतु अस्पताल के डाक्टरों की कुशलता के चलते उसकी सीटीओ एंजियोप्लास्टी की गई, जिससे उसे नया जीवन मिला। अस्पताल के निदेशक एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. एस.एस. बंसल ने बताया कि 62 वर्षीय रमेश सिंह लम्बे अरसे से छाती में दर्द तथा सांस फूलने की शिकायत से पीडि़त थे। उन्हें एसएसबी अस्पताल में एनजाइना के दर्द की शिकायत की वजह से भर्ती कराया गया। मरीज़ की एंजियोग्राफी की गई, जिसमें उनके हृदय की तीन धमनियों में से दो धमनियां में पुराने ब्लॉक्स थे जो बहुत सख्त तथा कैल्शियम युक्त थे। मरीज़ को ह्रदय की तीसरी आर्टरी में पहले से स्टंट डला हुआ था। डा. बंसल ने बताया कि हृदय में क्रिटिकल ब्लॉकेज के कारण मरीज़ की हृदय के पंप करने की क्षमता बहुत धीमी हो गयी थी, जो केवल 30 प्रतिशत रह गई थी, जब हृदय में इस तरह के जटिल ब्लॉक होते हैं, तो मरीजों को अक्सर बाईपास सर्जरी के लिए कहा जाता है। ऐसे मामलों में एंजियोप्लास्टी बेहद मुश्किल है और इसके लिए डॉक्टर का अनुभवी होना बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे जटिल ब्लॉकेज के लिए विश्व के अनुभवी से अनुभवी डॉक्टर भी फेमोरल आर्टरी से ही एंजियोप्लास्टी करते है परन्तु इस केस में मरीज़ की फेमोरल आर्टरी पूरी तरह से ब्लॉक थी, जिसकी वजह से फेमोरल आर्टरी से एंजियोप्लास्टी करना संभव नहीं था । ऐसे जटिल ब्लॉकेज में रेडियल रूट यानि कलाई की धमनी से एंजियोप्लास्टी करना बेहद चनौतीपूर्ण था इसीलिए मरीज़ के सख्त ब्लॉक्स को खोलने के लिए उन्होंने सीटीओ वायर्स एवं माइक्रो कॅथेटर्स का उपयोग कर हाथ की धमनी से मरीज़ की सफल एंजियोप्लास्टी की। डा. एस.एस. बंसल ने बताया कि आधुनिक तकनीक एवं अपने 28 वर्षों के अनुभव से मरीज़ की रेडियल आर्टरी से एंजियोप्लास्टी कर बाईपास सर्जरी की संभावनाओं को दूर कर दिया। उन्होंने बताया कि यह सफलता उन हृदय रोगियों के लिए उम्मीद पैदा करती है जो पहले से ही गंभीर बिमारियों से ग्रसित है या फिर जो मरीज़ बाईपास सर्जरी नहीं करवाना चाहतें है। सीटीओ जैसे जटिल ब्लॉकेज का इलाज़ पहले बाईपास सर्जरी के द्वारा किया जाता था, परन्तु नई तकनीक एवं डॉक्टर के अनुभव से ऐसे जटिल ब्लॉक्स को रेडियल आर्टरी के द्वारा खोल कर उस ब्लॉक में स्टेंटिंग करना संभव है। यह तकनीक मरीज़ों के लिए एक वरदान है। डा. बंसल ने बताया कि उन्होंने फरीदाबाद में पहली बार रेडियल एंजियोग्राफी 15 साल पहले शुरू की थी और हम ऐसे कई जटिल केस कर हज़ारों मरीज़ों की बाईपास सर्जरी की संभावनाओं को दूर कर पाये। उन्होंने बताया कि कलाई के माध्यम से डबल जटिल सीटीओ ब्लॉकेज को सफलतापूर्वक खोलना बहुत कठिन है और यह फरीदाबाद शहर का पहला केस है जिसे हम सफलतापूर्वक कर पाये है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य है कि लोगों को वाजिब दामों पर उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाए और इसी उद्देश्य को लेकर वह और उनके साथी डाक्टर प्रयासरत है। भविष्य में भी वह चिकित्सा क्षेत्र में ऐसी आधुनिक पद्धतियां अपनाएंगे, जिससे शहर के लोगों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा के लिए बाहर नहीं पड़ेगा।

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