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संविधान बदलो या भारत रत्न लिखना करो बंद!

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शकुन रघुवंशी
फरीदाबाद। देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न को लेकर संविधान की ही धारा आड़े आ रही है। शिकायतकर्ता नरेश कादियान ने इस बारे में अनेक स्तरों पर आवाज उठाई है। कादियान का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 18(1) के तहत किसी राष्ट्रीय सम्मान को नाम के साथ टाइटल के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। जबकि ऐसा देश में धडल्ले से हो रहा है। उन्होंने इसको लेकर एक पटीशन भी दाखिल की है।
पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले पीपुल फॉर एनीमल हरियाणा के चेयरमैन नरेश कादियान संविधान निर्माता डा बी आर अंबेडकर के नाम के साथ भारत रत्न लिखकर उसी संविधान का उल्लंघन किया जा रहा है और इस बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश का भी उल्लंघन किया जा रहा है। वह कहते हैं कि यदि किसी के नाम के साथ भारत रत्न लिखना बहुत जरूरी है तो संविधान के अनुच्छेद 18(1) में व्यापक बदलाव किया जाए। उनका दावा है कि इस अनुच्छेद के अनुसार किसी राष्ट्रीय सम्मान को टाइटल के रूप में प्रयोग कर नाम के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है जैसे कि डाक्टर, इंजीनियर या सीए की डिग्री को जोड़ा जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला
संविधान के अनुच्छेद 18(1) के संदर्भ में 15 दिसंबर 1995 को सुप्रीम कोर्ट ने हस्तांतरित मुकदमा नंबर नौ, 1994 एवं मुकदमा नंबर एक, 1995 में स्पष्ट निर्देश दिया है कि –
राष्ट्रीय पुरस्कार टाइटल्स नहीं हैं, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 18(1) के तहत नाम के प्रत्यय अथवा उपसर्ग के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
(“National awards do not amount to “Titles” within the meaning of article 18(1) of the Constitution and they should not be used as suffixes or prefixes”.)
नरेश कादियान कहते हैं कि मैं संविधान रचयिता बाबा साहेब का पूरा सम्मान करता हूं लेकिन संविधान का भी सम्मान करते हुए उनके नाम के आगे से भारत रत्न हटाया जाए अथवा संविधान के अनुच्छेद 18(1) में बदलाव किया जाए जिससे कि भारत रत्न को बाबा साहेब के नाम के आगे भारत रत्न लगाया जा सके। लेकिन मुझे उन लोगों पर गुस्सा आता है जो भारत के मान सम्मान के प्रतीक डा अंबेडकर को विशेष जाति अथवा संप्रदाय के साथ जोडक़र केवल अपने राजनैतिक मंसूबे ही पूरे करते हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के नाम पर भी ऐतराज
दिल्ली सरकार ने 29 जुलाई, 2008 को दिल्ली यूनिवर्सिटी का नाम भारत रत्न डा बी आर अंबेडकर यूनिवर्सिटी कर दिया। इस पर कादियान ने संविधान के अनुच्छेद 18(1) का जिक्र करते हुए सवाल उठाया तो आप सरकार ने हल खोजने के बजाय 21 मार्च 2017 को यूनिवर्सिटी के नाम से भारत रत्न ही हटा दिया। लेकिन कादियान पूछते हैं कि इस अवधि यानि 29 जुलाई 2008 से 21 मार्च 2017 के बीच हजारों छात्रों को डिग्रियां दी गई होंगी जिन पर भारत रत्न डा बी आर अंबेडकर यूनिवर्सिटी लिखा होगा, जो कि संविधान के अनुच्छेद के विरुद्ध है।
कादियान कहते हैं कि हमें लगता था कि आम आदमी पार्टी सरकार हमसे इस बारे में राय मांगेगी लेकिन सरकार ने अनुच्छेद पर रास्ता निकालने के बजाय डा अंबेडकर का नाम ही हटाना मुनासिब समझा। इससे पता चलता है कि यह लोग खार्स वर्ग के हितैषी होने का झूठा दंभ भरते हैं।
कार्रवाई नहीं हुई तो जांएगे सुप्रीम कोर्ट
इंटरनेशनल आर्गनाइजेशन फॉर एनीमल प्रोटेक्शन के भारतीय प्रतिनिधि नरेश कादियान का कहना है कि अभी तक तो वह सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे लेकिन इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वह अवश्य ही अदालत की शरण लेने के लिए मजबूर होंगे।
संविधान की रक्षा के लिए पटीशन दाखिल
14 अप्रैल को नरेश कादियान ने एक पटीशन दाखिल की है जिसकी प्रतियां काउंसिल ऑफ स्टेट्स राज्यसभा, एनएचआरसी, लोकायुक्त दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार, दिल्ली सरकार की पटीशन कमेटी, यूजीसी चेयरमैन, एआईसीटीई के चेयरमैन, नैक के निदेशक, डा बी आर अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली के रजिस्ट्रार को प्रेषित की गई हैं।
नरेश कादियान का दावा है कि वह पटीशन के जरिए संविधान की रक्षा का कार्य कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर भी दी लखित शिकायत
नरेश कादियान ने गुरुग्राम में लगी डा अंबेडकर की प्रतिमा के आगे लिखे भारत रत्न पर भी ऐतराज जताते हुए इसे हटाने अथवा संविधान में बदलाव लाने की बात कही है। उन्होंने इस बारे में मंडल आयुक्त गुरुग्राम, डीसी गुरुग्राम, स्थानीय अदालत, गुरुग्राम सिटी एसएचओ सहित सीएम विंडो भी शिकायत दी है।

For Querries : Naresh Kadyan – 9813010595

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करोना से हार गए सुरों के बंधु विश्वबंधु

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फरीदाबाद| विजय रामलीला कमेटी के पूर्व चेयरमैन व निर्देशक विश्वबंधु शर्मा पंचतत्व में विलीन हो गए। वह पिछले 7 दिनों से फरीदाबाद एन.आई.टी. के ई.एस.आई अस्पताल के आई.सी.यू. में करोना से जंग लड़ रहे थे| लेकिन हरि इच्छा से बन्धु जी ने जंगलवार सुबह 7 बजे इस नश्वर शरीर को छोड़ दिया। विजय रामलीला कमेटी के महासचिव सौरभ कुमार ने बताया कि विश्वबन्धु जी तीन तीन घण्टे निरंतर रयास किया करते थे और घंटों एक ही स्थान पर बैठ कर रामायण के श्री सुंदरकांड का पाठ वो सालों से करते आ रहे थे|  जिस से उनके लंग्स बहुत स्ट्रांग थे इसलिए वेंटीलेटर पर जाने के बाद भी उन्होंने पूरे दम से ये लड़ाई लड़ी और 7 दिनों से वो इस दर्द को झेल रहे थे।  
विश्वबंधु जी पिछले 56 बरसों से विजय रामलीला कमेटी का अभिन्न अंग रहे हैं| कमेटी का कहना है कि विजय रामलीला का मंच उनकी आवाज़ के बिना अकल्पनीय है। उन्होंने राम और सीता का रोल करीब 30 बरस किया|  गन्धर्व महाविद्यालय से संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रामायण को संगीतमय ढंग से प्रदर्शित करने की दिव्य कला के वह स्वामी थे। संस्था में केशियर, महासचिव, निर्देशक से लेकर चेयरमैन पद तक सभी पर कार्यरत रह कर व समय समय पर अपनी सेवायें देते रहे हैं| कमेटी आज ऐसी महान आत्मा को शत शत नमन करती है और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के इस सेवक को उनकी शरण प्राप्ति हो, ऐसी कामना करती है।
विश्वबंधु जी से जुड़े रहे उनके पडोसी राजेश शर्मा ने बताया कि वह सभी के लिए सहयोगी थे| वह सभी के कार्यों में मदद करने पहुँच जाते थे| सेक्टर में वह एक पिता की भूमिका में दिखते थे| एक बार हमारे यहाँ जागरण में सुबह से लेकर अगले दिन सुबह तक एक आयोजक की तरह चिंता करते रहे| हमने एक बड़ी विरासत खो दी| 

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लिंग्याज ने बनाया क्रेडिट कार्ड साइज का कंप्यूटर

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बोइची-इन.वी नाम के कंप्यूटर के साथ रखा गैजेट्स की दुनिया में कदम

फरीदाबाद | शिक्षण संस्था लिंग्यास विद्यापीठ, डीम्ड-टू-बी- यूनिवर्सिटी ने एक बार फिर ऐसा कुछ कर दिखाया है कि लोग अचंभित हो रहे हैं| इस बार विद्यापीठ के प्रोफेसर ने क्रेडिट साइज जितना कंप्यूटर तैयार किया गया है। इससे कंप्यूटर की दुनिया में क्रांति आ सकती है|

डॉ. नंद ने बताया कि मेरे इस छोटे से कंप्यूटर के जरिए आप कोई भी काम कर सकते हैं और उस डाटा को सेव भी कर सकते है।

इनोवेटर प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार नेबताया कि इस कंप्यूटर को बनाने में पीसीबी(PCBप्रिंटिड सर्केट बोर्ड) बोर्ड का इस्तेमाल किया गया है। इसे बोइची-इन.वी (असम के एक फूल का नाम) का नाम दिया गया है। जो कम जगह और कम बिजली में चलेगा| इस छोटे कंप्यूटर को अपने घर के टीवी के साथ भी जोड़ा जा सकता है।उन्होंने बताया कि इसको बनाने में काफी समय लगा लेकिन अब यह सुखद अहसास दे रहा है| ये आकार मे छोटे जरूर हैं, लेकिन इसकी भंडारण क्षमता अधिक है।

लिंग्याज ग्रुप के चेयरमैन डा. पिचेश्वर गड्डे का कहना हैं कि डॉ. नंद के द्वारा बनाए गए इस इनोवेशन में उनकी मेहनत और समय दोनों नजर आता है। मुझे अच्छा लगता है कि लिंग्याज के पास डॉं नंद जैसे प्रोफेसर हैं।

क्या-क्या हैं इस कंप्यूटर में
इस छोटे कंप्यूटर को लिनक्स बेस्ड ऑप्रेटिंग सिसटम के साथ मिलकर रास्पबेरी पाई नामक सर्केट बोर्ड का इस्तेमाल कर इसे तैयार किया गया है। जिसमें 4 जीबी रैम, 16 जीबी एसडी मैमोरी कार्ड लगा हुआ है। इतना ही नहीं आप इसमें 64 जीबी तक का कार्ड भी लगा सकते हैं। इस पीसीबी बोर्ड में 2 एचडीएमआई (HDMI- हाई डेफिनेशन मल्टीमीडिया इंटरफेस ) माईक्रो पोर्ट लगे हुए हैं। जिससे इसकी हाई पिक्चर क्वालिटी देखी जा सकेगी। इस कंप्यूटर  में 4 यूएसबी पोर्ट है। जिसमें ऑडियो-विडियों, कैमरा, माइक्रो-फोन, हेड फोन भी अटैच किया जा सकता है। वहीं इंटरनेट की सुविधा के लिए ईथरनेट पोर्ट व वाई-फाई कनेक्शन जोड़ा गया है।इतना ही नहीं इसमें बच्चों के लिए गेम्स, पावर प्वाइंट व एक्सेल भी है।
क्या आए बदलाव
दुनिया का पहला सीपीयू(CPU) माइको प्रोसेसर बेस्ड  , 1970 के दशक में Intelद्वारा बनाया गया था। तब से लेकर अब तक इसके डिजाइन और इम्पलीमेंट में कई बदलाव आ चुके हैं। परन्तु इसके Fundamental Operation अर्थात काम करने के तरीके में ज्यादा बदलाव नहीं आया है।संगणन शक्ति (Computing Power) के संदर्भ में सीपीयू एक कंप्यूटर प्रणालीका सबसे महत्वपूर्ण तत्व (Important element)है। प्रोसेसर को महत्वपूर्ण बनाने में इसके कम्पोनन्ट का बहुत बड़ा योगदान है।

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सीटीओ एंजियोप्लास्टी स्टेंटिंग से बाईपास सर्जरी से बचाव संभव : डा. बंसल

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डा. बंसल ने बताया कि हृदय में क्रिटिकल ब्लॉकेज के कारण मरीज़ की हृदय के पंप करने की क्षमता बहुत धीमी हो गयी थी, जो केवल 30 प्रतिशत रह गई थी, जब हृदय में इस तरह के जटिल ब्लॉक होते हैं, तो मरीजों को अक्सर बाईपास सर्जरी के लिए कहा जाता है।

एसएसबी अस्पताल ने काम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी के जरिए मरीज को दिया नया जीवन
फरीदाबाद। चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणीय एसएसबी अस्पताल के डाक्टरों ने काम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी के जरिए मरीज को नया जीवन दिया है। मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे बाईपास सर्जरी की जरूरत थी परंतु अस्पताल के डाक्टरों की कुशलता के चलते उसकी सीटीओ एंजियोप्लास्टी की गई, जिससे उसे नया जीवन मिला। अस्पताल के निदेशक एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. एस.एस. बंसल ने बताया कि 62 वर्षीय रमेश सिंह लम्बे अरसे से छाती में दर्द तथा सांस फूलने की शिकायत से पीडि़त थे। उन्हें एसएसबी अस्पताल में एनजाइना के दर्द की शिकायत की वजह से भर्ती कराया गया। मरीज़ की एंजियोग्राफी की गई, जिसमें उनके हृदय की तीन धमनियों में से दो धमनियां में पुराने ब्लॉक्स थे जो बहुत सख्त तथा कैल्शियम युक्त थे। मरीज़ को ह्रदय की तीसरी आर्टरी में पहले से स्टंट डला हुआ था। डा. बंसल ने बताया कि हृदय में क्रिटिकल ब्लॉकेज के कारण मरीज़ की हृदय के पंप करने की क्षमता बहुत धीमी हो गयी थी, जो केवल 30 प्रतिशत रह गई थी, जब हृदय में इस तरह के जटिल ब्लॉक होते हैं, तो मरीजों को अक्सर बाईपास सर्जरी के लिए कहा जाता है। ऐसे मामलों में एंजियोप्लास्टी बेहद मुश्किल है और इसके लिए डॉक्टर का अनुभवी होना बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे जटिल ब्लॉकेज के लिए विश्व के अनुभवी से अनुभवी डॉक्टर भी फेमोरल आर्टरी से ही एंजियोप्लास्टी करते है परन्तु इस केस में मरीज़ की फेमोरल आर्टरी पूरी तरह से ब्लॉक थी, जिसकी वजह से फेमोरल आर्टरी से एंजियोप्लास्टी करना संभव नहीं था । ऐसे जटिल ब्लॉकेज में रेडियल रूट यानि कलाई की धमनी से एंजियोप्लास्टी करना बेहद चनौतीपूर्ण था इसीलिए मरीज़ के सख्त ब्लॉक्स को खोलने के लिए उन्होंने सीटीओ वायर्स एवं माइक्रो कॅथेटर्स का उपयोग कर हाथ की धमनी से मरीज़ की सफल एंजियोप्लास्टी की। डा. एस.एस. बंसल ने बताया कि आधुनिक तकनीक एवं अपने 28 वर्षों के अनुभव से मरीज़ की रेडियल आर्टरी से एंजियोप्लास्टी कर बाईपास सर्जरी की संभावनाओं को दूर कर दिया। उन्होंने बताया कि यह सफलता उन हृदय रोगियों के लिए उम्मीद पैदा करती है जो पहले से ही गंभीर बिमारियों से ग्रसित है या फिर जो मरीज़ बाईपास सर्जरी नहीं करवाना चाहतें है। सीटीओ जैसे जटिल ब्लॉकेज का इलाज़ पहले बाईपास सर्जरी के द्वारा किया जाता था, परन्तु नई तकनीक एवं डॉक्टर के अनुभव से ऐसे जटिल ब्लॉक्स को रेडियल आर्टरी के द्वारा खोल कर उस ब्लॉक में स्टेंटिंग करना संभव है। यह तकनीक मरीज़ों के लिए एक वरदान है। डा. बंसल ने बताया कि उन्होंने फरीदाबाद में पहली बार रेडियल एंजियोग्राफी 15 साल पहले शुरू की थी और हम ऐसे कई जटिल केस कर हज़ारों मरीज़ों की बाईपास सर्जरी की संभावनाओं को दूर कर पाये। उन्होंने बताया कि कलाई के माध्यम से डबल जटिल सीटीओ ब्लॉकेज को सफलतापूर्वक खोलना बहुत कठिन है और यह फरीदाबाद शहर का पहला केस है जिसे हम सफलतापूर्वक कर पाये है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य है कि लोगों को वाजिब दामों पर उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाए और इसी उद्देश्य को लेकर वह और उनके साथी डाक्टर प्रयासरत है। भविष्य में भी वह चिकित्सा क्षेत्र में ऐसी आधुनिक पद्धतियां अपनाएंगे, जिससे शहर के लोगों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा के लिए बाहर नहीं पड़ेगा।

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