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200 वर्षों से प्रचारित झूठ का खंडन करने वाला लेख

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कौन कहता है कि द्रौपदी के पांच पति थे?
द्रौपदी का एक पति था- युधिष्ठिर

जर्मन के संस्कृत जानकार मैक्स मूलर को जब विलियम हंटर की कमेटी के कहने पर वैदिक धर्म के आर्य ग्रंथों को बिगाड़ने का जिम्मा सौंपा गया तो उसमे मनु स्मृति, रामायण, वेद के साथ साथ महाभारत के चरित्रों को बिगाड़ कर दिखाने का भी काम किया गया। किसी भी प्रकार से प्रेरणादायी पात्र – चरित्रों में विक्षेप करके उसमे झूठ का तड़का लगाकर महानायकों को चरित्रहीन, दुश्चरित्र, अधर्मी सिद्ध करना था, जिससे भारतीय जनमानस के हृदय में अपने ग्रंथो और महान पवित्र चरित्रों के प्रति घृणा और क्रोध का भाव जाग जाय और प्राचीन आर्य संस्कृति सभ्यता को निम्न दृष्टि से देखने लगें और फिर वैदिक धर्म से आस्था और विश्वास समाप्त हो जाय। लेकिन आर्य नागरिको के अथक प्रयास का ही परिणाम है कि मूल महाभारत के अध्ययन बाद सबके सामने द्रोपदी के पाँच पति के दुष्प्रचार का सप्रमाण खण्डन किया जा रहा है। द्रोपदी के पवित्र चरित्र को बिगाड़ने वाले विधर्मी, पापी वो तथाकथित ब्राह्मण, पुजारी, पुरोहित भी हैं जिन्होंने महाभारत ग्रंथ का अध्ययन किये बिना अंग्रेजो के हर दुष्प्रचार और षड्यंत्रकारी चाल, धोखे को स्वीकार कर लिया और धर्म को चोट पहुंचाई।_
*अब ध्यानपूर्वक पढ़ें—*

*विवाह का विवाद क्यों पैदा हुआ था:–*

(१) अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था। यदि उससे विवाह हो जाता तो कोई परेशानी न होती। वह तो स्वयंवर की घोषणा के अनुरुप ही होता।

(२) परन्तु इस विवाह के लिए कुन्ती कतई तैयार नहीं थी।

(३) अर्जुन ने भी इस विवाह से इन्कार कर दिया था। *”बड़े भाई से पहले छोटे का विवाह हो जाए यह तो पाप है। अधर्म है।”* (भवान् निवेशय प्रथमं)

मा मा नरेन्द्र त्वमधर्मभाजंकृथा न धर्मोsयमशिष्टः (१९०-८)

(४) कुन्ती मां थी। यदि अर्जुन का विवाह भी हो जाता,भीम का तो पहले ही हिडम्बा से (हिडम्बा की ही चाहना के कारण) हो गया था। तो सारे देश में यह बात स्वतः प्रसिद्ध हो जाती कि निश्चय ही युधिष्ठिर में ऐसा कोई दोष है जिसके कारण उसका विवाह नहीं हो सकता।

(५) आप स्वयं निर्णय करें कुन्ती की इस सोच में क्या भूल है? वह माता है, अपने बच्चों का हित उससे अधिक कौन सोच सकता है? इसलिए माता कुन्ती चाहती थी और सारे पाण्डव भी यही चाहते थे कि विवाह युधिष्ठिर से हो जाए।

*प्रश्न:-क्या कोई ऐसा प्रमाण है जिसमें द्रौपदी ने अपने को केवल एक की पत्नी कहा हो या अपने को युधिष्ठिर की पत्नी बताया हो?*

*उत्तर:-*

*(1)* द्रौपदी को कीचक ने परेशान कर दिया तो दुःखी द्रौपदी भीम के पास आई। उदास थी। भीम ने पूछा सब कुशल तो है? द्रौपदी बोली जिस स्त्री का पति राजा युधिष्ठिर हो वह बिना शोक के रहे, यह कैसे सम्भव है?

आशोच्यत्वं कुतस्यस्य यस्य भर्ता युधिष्ठिरः ।
जानन् सर्वाणि दुःखानि कि मां त्वं परिपृच्छसि ।।-(विराट १८/१)

_द्रौपदी स्वयं को केवल युधिष्ठिर की पत्नि बता रही है।_

*(2)* वह भीम से कहती है- जिसके बहुत से भाई, श्वसुर और पुत्र हों,जो इन सबसे घिरी हो तथा सब प्रकार अभ्युदयशील हो, ऐसी स्थिति में मेरे सिवा और दूसरी कौन सी स्त्री दुःख भोगने के लिए विवश हुई होगी-

भ्रातृभिः श्वसुरैः पुत्रैर्बहुभिः परिवारिता ।
एवं सुमुदिता नारी का त्वन्या दुःखिता भवेत् ।।-(२०-१३)

द्रौपदी स्वयं कहती है उसके बहुत से भाई हैं, बहुत से श्वसुर हैं, बहुत से पुत्र भी हैं,फिर भी वह दुःखी है। यदि बहुत से पति होते तो सबसे पहले यही कहती कि जिसके पाँच-पाँच पति हैं, वह मैं दुःखी हूँ,पर होते तब ना ।

*(3)* और जब भीम ने द्रौपदी को,कीचक के किये का फल देने की प्रतिज्ञा कर ली और कीचक को मार-मारकर माँस का लोथड़ा बना दिया तब अन्तिम श्वास लेते कीचक को उसने कहा था, *”जो सैरन्ध्री के लिए कण्टक था,जिसने मेरे भाई की पत्नी का अपहरण करने की चेष्टा की थी, उस दुष्ट कीचक को मारकर आज मैं अनृण हो जाऊंगा और मुझे बड़ी शान्ति मिलेगी।”-*

अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातुर्भार्यापहारिणम् ।
शांति लब्धास्मि परमां हत्वा सैरन्ध्रीकण्टकम् ।।-(विराट २२-७९)

इस पर भी कोई भीम को द्रौपदी का पति कहता हो तो क्या करें? मारने वाले की लाठी तो पकड़ी जा सकती है, बोलने वाले की जीभ को कोई कैसे पकड़ सकता है?

*(4)* द्रौपदी को दांव पर लगाकर हार जाने पर जब दुर्योधन ने उसे सभा में लाने को दूत भेजा तो द्रौपदी ने आने से इंकार कर दिया। उसने कहा जब राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं अपने को दांव पर लगाकर हार चुका था तो वह हारा हुआ मुझे कैसे दांव पर लगा सकता है? महात्मा विदुर ने भी यह सवाल भरी सभा में उठाया। *द्रौपदी ने भी सभा में ललकार कर यही प्रश्न पूछा था -क्या राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं को हारकर मुझे दांव पर लगा सकता था? सभा में सन्नाटा छा गया।* किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। तब केवल भीष्म ने उत्तर देने या लीपा-पोती करने का प्रयत्न किया था और कहा था, *”जो मालिक नहीं वह पराया धन दांव पर नहीं लगा सकता परन्तु स्त्री को सदा अपने स्वामी के ही अधीन देखा जा सकता है।”-*

अस्वाभ्यशक्तः पणितुं परस्व ।स्त्रियाश्च भर्तुरवशतां समीक्ष्य ।-(२०७-४३)

*”ठीक है युधिष्ठिर पहले हारा है पर है तो द्रौपदी का पति और पति सदा पति रहता है, पत्नी का स्वामी रहता है।”*

यानि द्रौपदी को युधिष्ठिर द्वारा हारे जाने का दबी जुबान में भीष्म समर्थन कर रहे हैं। यदि द्रौपदी पाँच की पत्नी होती तो वह ,बजाय चुप हो जाने के पूछती,जब मैं पाँच की पत्नी थी तो किसी एक को मुझे हारने का क्या अधिकार था? द्रौपदी न पूछती तो विदुर प्रश्न उठाते कि “पाँच की पत्नि को एक पति दाँव पर कैसे लगा सकता है? यह न्यायविरुद्ध है।”

_स्पष्ट है द्रौपदी ने या विदुर ने यह प्रश्न उठाया ही नहीं। यदि द्रौपदी पाँचों की पत्नी होती तो यह प्रश्न निश्चय ही उठाती।_

इसीलिए भीष्म ने कहा कि द्रौपदी को युधिष्ठिर ने हारा है। युधिष्ठिर इसका पति है। चाहे पहले स्वयं अपने को ही हारा हो, पर है तो इसका स्वामी ही। और नियम बता दिया – जो जिसका स्वामी है वही उसे किसी को दे सकता है,जिसका स्वामी नहीं उसे नहीं दे सकता।

*(5)* द्रौपदी कहती है- *”कौरवो ! मैं धर्मराज युधिष्ठिर की धर्मपत्नि हूं।तथा उनके ही समान वर्ण वाली हू।आप बतावें मैं दासी हूँ या अदासी?आप जैसा कहेंगे,मैं वैसा करुंगी।”-*

तमिमांधर्मराजस्य भार्यां सदृशवर्णनाम् ।
ब्रूत दासीमदासीम् वा तत् करिष्यामि कौरवैः ।।-(६९-११-९०७)

*द्रौपदी अपने को युधिष्ठिर की पत्नी बता रही है।*

*(6)* पाण्डव वनवास में थे दुर्योधन की बहन का पति सिंधुराज जयद्रथ उस वन में आ गया। उसने द्रौपदी को देखकर पूछा -तुम कुशल तो हो?द्रौपदी बोली सकुशल हूं।मेरे पति कुरु कुल-रत्न कुन्तीकुमार राजा युधिष्ठिर भी सकुशल हैं।मैं और उनके चारों भाई तथा अन्य जिन लोगों के विषय में आप पूछना चाह रहे हैं, वे सब भी कुशल से हैं। राजकुमार ! यह पग धोने का जल है। इसे ग्रहण करो।यह आसन है, यहाँ विराजिए।-

कौरव्यः कुशली राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः
अहं च भ्राताश्चास्य यांश्चा न्यान् परिपृच्छसि ।-(१२-२६७-१६९४)

*द्रौपदी भीम,अर्जुन,नकुल,सहदेव को अपना पति नहीं बताती,उन्हें पति का भाई बताती है।*

और आगे चलकर तो यह एकदम स्पष्ट ही कर देती है। जब युधिष्ठिर की तरफ इशारा करके वह जयद्रथ को बताती है—

एतं कुरुश्रेष्ठतमम् वदन्ति युधिष्ठिरं धर्मसुतं पतिं मे ।-(२७०-७-१७०१)

*”कुरू कुल के इन श्रेष्ठतम पुरुष को ही ,धर्मनन्दन युधिष्ठिर कहते हैं। ये मेरे पति हैं।”*

क्या अब भी सन्देह की गुंजाइश है कि द्रौपदी का पति कौन था?

*(7)* कृष्ण संधि कराने गए थे। दुर्योधन को धिक्कारते हुए कहने लगे”– दुर्योधन! तेरे सिवाय और ऐसा अधम कौन है जो बड़े भाई की पत्नी को सभा में लाकर उसके साथ वैसा अनुचित बर्ताव करे जैसा तूने किया। –

कश्चान्यो भ्रातृभार्यां वै विप्रकर्तुं तथार्हति ।
आनीय च सभां व्यक्तं यथोक्ता द्रौपदीम् त्वया ।।-(२८-८-२३८२)

कृष्ण भी द्रौपदी को दुर्योधन के बड़े भाई की पत्नी मानते हैं।

*अब सत्य को ग्रहण करें और द्रौपदी के पवित्र चरित्र का सम्मान करें।*

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क्या पार्षद पर शराब पीने का आरोप लगाने वाले विधायक Neeraj Sharma भी शराब के नशे में थे?

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अतिक्रमण नहीं किया, मां ने बारिश में डूबने से बचाया घर – विधायक

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बोले विधायक नीरज शर्मा, एनआईटी विस में किसी का घर नहीं डूबने दूंगा
फरीदाबाद। एनआईटी विधायक नीरज शर्मा ने अपने घर के बाहर नगर निगम द्वारा की गई तोडफ़ोड़ पर आज अपना पक्ष मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले उन्होंने निगम पार्षद सुरेंंद्र अग्रवाल को सरकारी भवन में शराब पीते लाइव पकड़ा था, जिसके विरोध में उन्होंने अन्य पार्षदों के सहयोग से नगर निगम से यह कार्रवाई करवाई है। जबकि यह घर उनकी मां का है। विधायक ने कहा कि वह गलत को बर्दाश्त नहीं करेंगे और उनकी मुहिम जारी रहेगी।
पुलिस पर भरोसा कर गलती की : विधायक
विधायक नीरज शर्मा बोले कि उन्होंने पुलिस पर विश्वास कर गलती की है। उन्होंने जब पार्षद को मौके पर शराब पीते पकड़ा था और पुलिस को मौके पर ही बुला लिया था तो उन्हें उसका मेडिकल करवाने के बाद ही वहां से हटना चाहिए था। इतने में पुलिस ने मामला रफा दफा कर दिया। उन्हें पुलिस ने पार्षद व अन्य का मेडिकल करवाने का विश्वास दिखाया था जिसके बाद वह चंडीगढ़ निकल गए थे। अब पुलिस कह रही है कि वहां पर लस्सी पी जा रही थी। विधायक ने पूछा कि शराब की बोतल में लस्सी कहां सप्लाई होती है, पुलिस इसका जवाब दे।

विधायक नीरज शर्मा की मां भाई के घर के बाहर तोड़फोड़ करते निगमकर्मी।

गलत मंशा के साथ मेरी मां के घर की गई तोडफ़ोड़ : विधायक
विधायक शर्मा ने बताया जिस घर पर तोडफ़ोड़ की गई है वहां उनकी बुजुर्ग मां रहती हैं और उन्होंने यहां एक एक फुट ऊंची ईंट इसलिए लगवाई थीं क्योंकि गली के ऊपर हो जाने से उनका मकान नीचा हो गया है जिसमें बारिश का पानी भर जाता है। जिससे न केवल फर्नीचर और दीवारें खराब हो जाती हैं बल्कि सामान्य कामकाज भी बाधित हो जाता है।
विधायक नीरज शर्मा ने बताया कि कॉलोनी में गलियां और सडक़ें बार बार बनने के कारण मकान नीचे हो गए हैं जिसके कारण बारिश के पानी घरों में भरता है। अब एक मां ने उस बारिश के पानी से अपना घर बचाने के लिए दो ईंट लगा लीं, जिसे आज अतिक्रमण का नाम दिया जा रहा है। यदि पार्षद सुरेंद्र अग्रवाल व अन्य को कोई कार्रवाई करवानी थी तो वह मुझ पर करवाते। उन्होंने मेरी मां के खिलाफ कार्रवाई करवाई है। जबकि चार मकानों की इस गली में किसी को उससे कोई दिक्कत नहीं है। दूसरा यह गली आम गुजरने की गली भी नहीं है।
और किसी का मकान नहीं डूबने दूंगा : विधायक
विधायक नीरज शर्मा ने व्हाइट मिर्ची के सवाल के जवाब में कहा कि मेरी मां का घर तो डूब गया लेकिन अब मैं एनआईटी में किसी गली अथवा सडक़ के निर्माण के कारण लोगों के मकान नीचे नहीं होने दूंगा। श्री शर्मा ने कहा कि नगर निगम के नियमों में सामान्यतया यह टेंडर का नियम है कि पिछली परत को उखाडक़र नया निर्माण होना चाहिए जिसका समय और पैसा बचाने के लिए ठेकेदार पालन नहीं करते हैं। नतीजतन मकान धीरे धीरे नीचे हो जाते हैं और सडक़ व गलियां ऊंची हो जाती हैं जिससे लोगों को जलभराव व जलजमाव की दिक्कतें पेश आती हैं। उन्होंने कहा कि वह आने वाले टेंडरों में यह बात लागू करवाएंगे कि नया निर्माण ऊंचा न हो और पिछली परत को उखाडक़र ही किया जाए।

मॉनसून आने पर दिखाऊंगी घर का हाल : माया शर्मा
विधायक की मां एवं पूर्व पार्षद माया शर्मा ने बताया कि कोई भी व्यक्ति यहां उनके घर को आकर देख सकता है। उनका मकान सडक़ से करीब ढाई फुट नीचे हो गया है। जब तक यह मकान तोडक़र दोबारा नहीं बनाया जाएगा, तब तक हमारे घर में बारिश का पानी भरता ही रहेगा। मेरी दो ईंट हटाने से यदि शहर अतिक्रमण मुक्त होता है तो नगर निगम यह भी कर ले। लेकिन अभी मॉनसून में मेरे घर का क्या हाल होगा, वो भी मैं सबको दिखाऊंगी।
विधायक के भाई मुनेश शर्मा ने बताया कि पिछली बारिश में उनके घर में शादी थी लेकिन बारिश का पानी घर में भरने से सारा सामान खराब हो गया था और रिश्तेदारों को बैठाना मुश्किल हो गया था।

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यूथ कांग्रेस का हाथ, नव धनाढ्यों के साथ

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यूथ कांग्रेस की चुनाव प्रक्रिया का अंदरखाते हो रहा भारी विरोध
कहीं रही बची इज्जत भी दांव पर न लगा दे विरोध की चिंगारी

फरीदाबाद। हरियाणा एवं गुजरात में प्रदेश यूथ कांग्रेस की चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही अंदरखाते विरोध की चिंगारी भी सुलगने लगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पेट्रोल मूल्यवृद्धि पर भाजपा को घेरने की कोशिश में लगी यूथ कांग्रेस ने सदस्यता शुल्क में 10 गुने की बढ़ोतरी की है। जो बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है और नवधनाढ्यों को राजनीति में स्थापित करने की साजिश है।
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं हरियाणा यूथ कांग्रेस के प्रभारी दीपक भाटी चोटीवाला ने बताया कि फिलहाल हरियाणा और गुजरात में कमेटियों के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है। कोविड के कारण थोड़ा देरी से लेकिन सदस्यता अभियान को दु्रत गति दी गई है। इसमें कोई भी 18 से 35 वर्ष का भारतीय नागरिक 50 रुपये का शुल्क देकर युवा कांग्रेस का सदस्य बन सकता है। जिसके लिए हम हर जिले में जाकर साथियों में जोश भर रहे हैं। गौरतलब है कि यह शुल्क गत चुनाव में पांच रुपये था।
गरीब कार्यकर्ता तो चुनाव नहीं लड़ पाएगा
यूथ कांग्रेस की स्थापना वर्ष 1960 में की गई थी, तब इसकी सदस्यता का शुल्क 50 पैसे था, जो समय के साथ बढ़ते बढ़ते गत चुनाव तक पांच रुपये और इस बार 50 रुपये हो गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें दौड़ में बने रहने के लिए हजारों की संख्या में सदस्य बनाने होंगे और यह सर्वविदित तथ्य है कि अधिकांश सदस्यों का शुल्क नेता को खुद ही देना पड़ता है। ऐसे में गरीब कार्यकर्ता तो पदाधिकारी बनने का सपना देख ही नहीं पाएगा।
जिसपे जितनी संख्या भारी, उसपे वैसी जिम्मेदारी
चुनाव की व्यवस्था ऐसी है कि सदस्यता जुटाने की क्षमता के हिसाब से कार्यकर्ताओं को पद दिए जाएंगे। ऐसे में एक अनुमान है कि विधानसभा के लिए कम से कम एक हजार, जिले के लिए पांच हजार और प्रदेश के लिए 10 हजार सदस्यों की संख्या मानक हो सकती है। इससे कम सदस्य बनाने वाले पदाधिकारी बनने का सपना न ही देखें तो अच्छा होगा।
मतलब साफ है कि विधानसभा में पदाधिकारी बनने के लिए 50 हजार, जिले में ढाई लाख और प्रदेश में पांच लाख रुपये जुटाने पड़ सकते हैं।
विरोध के कारण और भी हैं
विरोध का कारण केवल सदस्यता ही नहीं है बल्कि चुनाव नामांकन की फीस भी दोगुना किए जाने से संभावित दावेदार नाराज हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस कैसे महंगाई और मूल्यवृद्धि पर केंद्र सरकार को घेर सकती है जब उसने ही अपनी सदस्यता शुल्क में दस गुने की और नामांकन शुल्क में दोगुनी की वृद्धि की है।
चोटीवाला ने बताया कि विधानसभा स्तर के लिए 1500 रुपये, जिले के लिए 3000 रुपये और प्रदेश के लिए 7500 रुपये शुल्क रखा गया है। हालांकि अनुसूचित जाति/जनजाति के उम्मीदवारों को इसमें 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। लेकिन संभावित उम्मीदवार कहते हैं कि गरीबी जाति देखकर नहीं आती।
नवधनाढ्यों के लिए है सदस्यता अभियान
एक अनुमान के मुताबिक हरियाणा प्रदेश में सदस्यता का आंकड़ा 10 लाख की संख्या को पार कर सकता है। ऐसे में कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि करोड़ों रुपयों में जुटने वाली रकम के खैवनहार वही नव धनाढ्य होंगे जिनके पास पापा का पैसा तो है लेकिन पद नहीं है। गरीब कार्यकर्ता उनकी दरियों को बिछाने का कार्य पहले की तरह बदस्तूर करता रहेगा।
रिटर्निंग ऑफिसर भी कर रहे काम
अखिल भारतीय कमेटी द्वारा इस चुनाव प्रक्रिया को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए आंध्र प्रदेश के नरसिंह रेड्डी को जोनल रिटर्निंग अधिकारी बनाया गया है। वह कार्यकर्ताओं को वोटिंग, मेंबरशिप आदि का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
प्रदेश टीम में जुडऩे को आतुर
वैसे बता दें कि फरीदाबाद निवासी यूथ कांग्रेस प्रवक्ता पराग शर्मा व प्रदेश सचिव राजेश खटाना व अन्य ऐसे अनेक नाम हैं जो अपना कद बढ़ाना चाहते हैं। जानकारी के अनुसार यह लोग सदस्यता अभियान में जमकर दम लगा रहे हैं।

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