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वाह ज़िन्दगी

आसाराम आश्रम में विद्यार्थी तालीम शिविर 12 से

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फरीदाबाद। भांखरी स्थित संत आसारामजी बापू आश्रम द्वारा विद्यार्थियों के लिए तालीम शिविर का आयोजन 12 से 14 अप्रैल को किया जाएगा। इस शिविर में हरियाणा, दिल्ली व एनसीआर से सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी भागीदारी करेंगे।

भांखरी आश्रम के संचालक श्री रामा भाई ने बताया कि इस तालीम शिविर में विद्यार्थियों को आसन, प्राणायाम, स्वास्थ्य की कुंजियां, परीक्षा में अच्छे परिणाम लाने के नुस्खे, त्रिकाल संध्या, ध्यान और अन्य यौगिक क्रियाएं सिखाई जाएंगी। रामा भाई के सान्निध्य में हो रहे इस शिविर में विद्यार्थियों को अनुभव युक्त सफलता के सूत्र बताए जाएंगे। वहीं अनेक प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं को भी आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं में भागीदार को पुरस्कृत किया जाएगा। आश्रम द्वारा देश भर में आयोजित इन शिविरों के माध्यम से लाखों विद्यार्थियों को भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित किया जाएगा।

विशेष बात यह है कि इस शिविर में बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी बड़ी संख्या में भागीदारी कर रहे हैं और वह भी शिविर में यौगिक क्रियाओं व अन्य प्रतिस्पर्धाओं में भागीदारी करते हुए अध्यात्मक का ज्ञान प्राप्त करेंगे।

वाह ज़िन्दगी

हनुमान जयंती के प्रकाश में करें उनके कुछ पराक्रमों का स्मरण !

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‘जो बुद्धिजीवी हनुमानजी को केवल एक वानर मानकर उनकी आलोचना करते हैं, वे निम्न अनुभूति पर अवश्य चिंतन करें तथा अपने मन से यह प्रश्‍न पूछें कि जो हनुमानजी के लिए संभव था, क्या वह पृथ्वी तल पर किसी भी मनुष्य के लिए संभव होगा ? बुद्धिजीवियो, आपके सामने केवल २ ही विकल्प हैं, एक तो आप हनुमानजी की भांति न्यूनतम एक पराक्रम करने के लिए सिद्ध हो जाएं अथवा हनुमानजी के निम्न अतुलनीय पराक्रमों को स्वीकार कर अपनी हार स्वीकार करें !

१. आकाश में उडना

जन्म के पश्‍चात ही उदित होते सूर्य को फल समझकर हनुमानजी आकाश में उडे थे ।

२. महिलाआें की रक्षा करना

२ अ. सुग्रीव की पत्नी रूमा की शीलरक्षा करना

राम-लक्ष्मण की सुग्रीव से भेंट कराने के लिए हनुमानजी इन दोनों को अपने कंधे पर बिठाकर पंपा सरोवर के परिसर से ऋष्यमुख पर्वत तक उडते हुए पर्वत की ओर ले गए । सुग्रीव की पत्नी रूमा जब बाली के नियंत्रण में थी, उस समय वह जब भी हनुमानजी का स्मरण करती, हनुमानजी प्रकट होकर उसकी शीलरक्षा करते थे ।

२ आ. सीता की खोज

हनुमानजी ने समुद्र को लांघकर लंका में प्रवेश किया तथा सीता को खोजकर उनतक श्रीरामजी का संदेश पहुंचाया ।

३. राम-लक्ष्मण की रक्षा करना तथा उनकी विविध प्रकार से सहायता करना

अ. इंद्रजीत ने जब राम-लक्ष्मण पर नागपाश डालकर उनको विष से मारने का प्रयास किया, तब हनुमानजी ने तत्परता से विष्णुलोक की ओर दौड लगाई और गरुड से सहायता लेकर राम-लक्ष्मण को नागपाश से छुडाया ।

आ. लक्ष्मणजी जब युद्ध में घायल हो गए थे, तब उसकी मृत्यु न हो, इसलिए हनुमानजी ने उत्तर दिशा में उडान भरकर वहां से संजीवनी वनस्पति से युक्त पूरा द्रोणागिरी पर्वत ही उठा लाए ।

इ. अहिरावण तथा महिरावण जब अपनी मायावी सिद्धियों द्वारा राम-लक्ष्मण को पाताल ले गए, तब हनुमानजी पाताल गए तथा अहिरावण तथा महिरावण से युद्ध कर, उनको नष्ट किया और राम-लक्ष्मण को सुरक्षित पृथ्वी पर ले आए ।

ई. हनुमानजी ने श्रीराम को अनेक अमूल्य सुझाव दिए जैसे विभीषण चाहे शत्रु का भाई हो, तब भी उसे मित्र के रूप में स्वीकार करें तथा सीता अग्नि से भी पवित्र है, इसलिए उन्हें ‘पत्नी के रूप में स्वीकार करें ।’

उ. श्रीरामजी के कहने पर आज्ञापालन के रूप में श्रीरामजी की अवतार-समाप्ति के पश्‍चात हनुमानजी ने लव-कुश को रामराज्य चलाने में सहायता की ।

४. हनुमानजी द्वारा किया गया आज्ञापालन

अ. ईश्‍वर की आज्ञा से हनुमानजी ने महाभारत के युद्ध के समय, अर्जुन के दैवी रथ पर आरूढ होकर धर्म की रक्षा की ।

आ. श्रीकृष्णजी की आज्ञापालन के रूप में हनुमानजी ने सेवाभाव से भीम, अर्जुन, बलराम, गरुड तथा सुदर्शनचक्र के गर्वहरण का महान कार्य किया था ।

५. नल-नील वानरों की सहायता

हनुमानजी ने सेतुनिर्माण के समय शिलाआें पर श्रीरामजी का नाम अंकित कर नल-नील की सहायता की ।

६. लंकादहन करना

हनुमानजी की पूंछ को आग लगने पर अग्नि की ज्वालाएं उनके शरीर को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा सकी, इसके विपरीत हनुमानजी ने लंकादहन किया ।

७. हनुमानजी के रूप

अ. सप्तचिरंजीव के रूप में हनुमानजी रक्षा तथा मार्गदर्शन का कार्य करते हैं तथा कलियुग में भी जहां-जहां श्रीराम का गुणगान गाया जाता है, वहां सूक्ष्म रूप में उपस्थित रहकर, रामभक्तों को आशीर्वाद देकर अभय प्रदान करते हैं ।

आ. हनुमानजी की श्रीरामजी के प्रति असीम दास्यभक्ति तथा शौर्य के कारण उनके दास हनुमान तथा वीर हनुमान ये २ रूप विख्यात हैं । आवश्यकता के अनुरूप हनुमानजी इन २ रूपों को धारण कर उचित कार्य करते हैं ।

इ. साधना करनेवाले किसी भी जीव को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हनुमानजी के सूक्ष्म-रूप के कारण हमारे अंतःकरण में बसे अहंकाररूपी रावण की लंका का दहन करने पर हमारे हृदय में रामराज्य आरंभ होता है ।

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वाह ज़िन्दगी

परमपद प्राप्ति हेतु आत्मशुद्धि आवश्यक – सजन जी

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सतयुग दर्शन ट्रस्ट का वार्षिक रामनवमी यज्ञ महोत्सव, आज भूपानी स्थित सतयुग दर्शन वसुंधरा पर कुदरती ग्रन्थ व रामायण के अखंड पाठ के साथ आरंभ हुआ। इसके बाद मार्गदर्शक श्री सजन जी ने उपस्थित सजनों को आत्मशुद्धि करने का आवाहन दिया। इस अवसर पर ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने उपस्थित सजनों को कहा कि हमारा वास्तविक स्वरूप विशुद्धता की प्रतीक है। इस स्वरूप का बोध करने हेतु आध्यात्मिक शिक्षा अनिवार्य है। एकमात्र आध्यात्मिक शिक्षा ही  आत्मशुद्धि का अति उत्तम साधन है। आत्मशुद्धि से तात्पर्य मन और शरीर इन दोनों की पवित्रता से है।

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चैत्र मास में सूर्यदेव की पूजा विवस्वान के नाम से करनी चाहिए : धर्मबीर भड़ाना

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फरीदाबाद: चैत्र मास की छठ पूजा कोचैती छठ के नाम से भी जाना जाता है। भविष्य पुराण में बताया गया है कि कार्तिक मास की और चैत्र मास की छठ (चैत छठ) का विशेष महत्व है। चैत्र मास में नवरात्र के दौरान ही हर साल षष्ठी तिथि को चैत छठ पर्व मनाया जाता है। पुराण में बताया गया है कि चैत्र मास में सूर्यदेव की पूजा विवस्वान के नाम से करनी चाहिए। उक्त वक्तव्य धर्मबीर भड़ाना ने पूर्वी सेवा समिति द्वारा राजा चौक स्थित छठ घाट पर चैत्र मास की छठ पूजा के समापन समारोह के दौरान कहे। उन्होंने छठ पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि इन दिनों पुराणों के अनुसार वैवस्वत मनवंतर चल रहा है। इस मन्वंतर में सूर्यदेव ने देवमाता अदिति के गर्भ से जन्म लिया था और विवस्वान एवं मार्तण्ड कहलाए। इन्हीं की संतान वैवस्वत मनु हुए जिनसे सृष्टि का विकास हुआ है। शनि महाराज, यमराज, यमुना, एवं कर्ण भी इन्हीं की संतान हैं। इससे पूर्व पूर्वी सेवा समिति ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। उन्होंने पूर्वी समाज की आस्था और उनके द्वारा किए जाने वाले आयोजनों को आस्था का प्रतीक बताया और कहा कि पूर्वी समाज हमेशा बढ़-चढक़र धार्मिक आयोजन करता रहा है। फरीदाबाद में पूर्वी समाज एक अलग स्थान रखता है। इस अवसर पर उनके साथ पूर्वी सेवा समिति के प्रधान सुनील कुमार, माधव झा, मिथलेश, गौतम जैसवाल, धर्मराज, अच्छे लाल, डॉ. देव, डॉ. ए के गोस्वामी, संजय कुमार, सुरेन्द्र, नरेश समेत काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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