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52 साल का हुआ म्हारा हरियाणा, जानें कब क्या हुआ…

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1 नवंबर 1966 को पंजाब से विभाजित कर के हरियाणा राज्य का गठन हुआ था| हरियाणा को अस्तित्व में आये आज 52 साल हो गए है| इन 52 सालों में प्रदेश ने कई उपलब्धियां हासिल कीं तो कई मोर्चों पर विफल भी रहा। पचास वर्ष से दो कदम आगे बढ़ चुके हरियाणा ने अपने गठन के बाद से अब तक अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। बावजूद इसके हरि की नगरी हरियाणा के विकास का पहिया बिल्कुल नहीं रुका। प्रदेश मजबूत आर्थिक स्थिति के साथ अपने पैरों पर खड़ा है। इसके साथ ही हरियाणा की बेटों और बेटियों ने हरियाणा का नाम आसमान की बुलंदिओं तक पहुंचाया है| हरियाणा के नौजवान तो हर क्षेत्र में नाम रोशन कर रहे हैं| बॉर्डर से लेकर खेलकूद तक हर जगह हरियाणवी छाए रहते हैं| किसी एक गांव से सबसे ज्यादा फौजी भी हरियाणा के एक गांव से ही हैं| वहीं कोई भी प्रतियोगिता हो, ओलंपिक या एशियन गेम्स, हर बार सबसे ज्यादा मेडल हरियाणा के खिलाड़ी ही लाते हैं| वहीं सिर्फ खेल ही नहीं कला क्षेत्र में भी हरियाणा के निवासी बेहतरीन काम कर रहे हैं|

सरकार कर्ज कम कर वित्तीय स्थिति और सुदृढ़ करने के इरादे के साथ आगे बढ़ रही है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय, राष्ट्रीय से भी ज्यादा है। आर्थिक विकास दर मंदी के दौर में बेशक कुछ कम हुई, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में फिर से उछाल आने की संभावना सरकार ने जताई है। विकास के नए आयाम स्थापित करने वाले इस प्रदेश के सामने अनसुलझे सवाल भी कम नहीं हैं। प्रगति होने के साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं।

हरियाणा दिवस के मौके पर प्रदेश को सौगात !

1966 में अपने गठन के बाद से प्रदेश अब तक न तो अपनी अलग राजधानी बना पाया, न ही अलग हाईकोर्ट। नहरी पानी के बंटवारे पर पेच बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बावजूद हरियाणा की जीवनरेखा मानी जाने वाली एसवाईएल का निर्माण अभी तक अधर में है। इसे लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच गठन के बाद से ही तलवारें खिंची हुई हैं। पंजाब पानी की एक बूंद देने को तैयार नहीं तो हरियाणा अपना हक लेने को प्रतिबद्ध। ताकि दक्षिणी हरियाणा का किसान व इंसान खुशहाल हो सके।

भगवान हरी के नाम से बने हरियाणा में बीते सालों में हुई हिंसक घटनाओं ने प्रदेश को शर्मसार भी किया है। इससे प्रदेश की छवि पर विपरीत असर भी पड़ा। आपसी सौहार्द बिगड़ा और आज भी स्थिति यह है कि जाट और नॉन जाट के रिश्तों बीच आई दरार भर नहीं पाई है। जनता में विश्वास बहाली भी सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती है।

प्रदेश की विकास यात्रा लंबी नहीं है, लेकिन इसने तेजी से कदम दर कदम सफलता के जो पड़ाव पार किए हैं, वे बेमिसाल हैं। यह वही भूमि है, जहां आर्यों ने पहला स्तोत्र गाया। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। यह भूमि महाभारत जैसे युग परिवर्तक युद्ध के साथ ही उत्तर मध्यकाल में भारत के इतिहास पर अमिट प्रभाव छोड़ने वाली पानीपत की तीन लड़ाइयों का गवाह रही। हरि अयन (विष्णु निवास) नाम से पहचान रखने वाला यह इलाका कई उतार-चढ़ाव के बाद 1 नवंबर 1966 को हरियाणा नाम से अलग राज्य बना।

चंदगीराम, सुशील कुमार, योगेश्वरदत्त, गीता, बबीता जैसी पहलवान, बॉक्सर बिजेंद्र, मनोज कुमार, सर छोटूराम और चौधरी देवीलाल जैसे जननायक देने वाली इस धरा के वीरों ने देश की रक्षा में अतुल्य योगदान दिया है। इस माटी से जन्मे रागिनी गायक लखमीचंद, मेहरसिंह लोक संस्कृति के वाहक बने, वहीं अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला, सरीखी अनेक प्रतिभाओं ने अपने राज्य के साथ ही देश का मान भी बढ़ाया है।

प्रदेश ने क्या पाया
प्रति व्यक्ति आय विकास दर 7.2, राष्ट्रीय 5.9, औद्योगिक विकास, खेलों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम, अंतरिक्ष में पहुंची कल्पना चावला, पढ़ी-लिखी पंचायत, लिंगानुपात में सुधार, केरोसीन फ्री

प्रदेश ने क्या खोया
भाईचारा, देशी व विदेशी निवेश, दूसरे राज्यों में गए निवेशक, साफ-सुथरा वातावरण, शुद्ध पानी

ये पांच बड़ी चुनौतियां
एसवाईएल का निर्माण, अलग राजधानी, अलग हाईकोर्ट, वित्तीय स्थिति और सुधारना, सात लाख घरों में बिजली पहुंचाना

प्रदेश में तीन बड़ी घटनाएं:
– जाट आरक्षण आंदोलन में 32 लोगों की मौत, हिंसा की आग में जला हरियाणा
– पंचकूला हिंसा, डेरामुखी प्रकरण में 42 लोगों की मौत। करोड़ों का नुकसान।
– संत रामपाल आश्रम करौंथा में हिंसा, 6 लोगों की मौत

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क्या पार्षद पर शराब पीने का आरोप लगाने वाले विधायक Neeraj Sharma भी शराब के नशे में थे?

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अतिक्रमण नहीं किया, मां ने बारिश में डूबने से बचाया घर – विधायक

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बोले विधायक नीरज शर्मा, एनआईटी विस में किसी का घर नहीं डूबने दूंगा
फरीदाबाद। एनआईटी विधायक नीरज शर्मा ने अपने घर के बाहर नगर निगम द्वारा की गई तोडफ़ोड़ पर आज अपना पक्ष मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले उन्होंने निगम पार्षद सुरेंंद्र अग्रवाल को सरकारी भवन में शराब पीते लाइव पकड़ा था, जिसके विरोध में उन्होंने अन्य पार्षदों के सहयोग से नगर निगम से यह कार्रवाई करवाई है। जबकि यह घर उनकी मां का है। विधायक ने कहा कि वह गलत को बर्दाश्त नहीं करेंगे और उनकी मुहिम जारी रहेगी।
पुलिस पर भरोसा कर गलती की : विधायक
विधायक नीरज शर्मा बोले कि उन्होंने पुलिस पर विश्वास कर गलती की है। उन्होंने जब पार्षद को मौके पर शराब पीते पकड़ा था और पुलिस को मौके पर ही बुला लिया था तो उन्हें उसका मेडिकल करवाने के बाद ही वहां से हटना चाहिए था। इतने में पुलिस ने मामला रफा दफा कर दिया। उन्हें पुलिस ने पार्षद व अन्य का मेडिकल करवाने का विश्वास दिखाया था जिसके बाद वह चंडीगढ़ निकल गए थे। अब पुलिस कह रही है कि वहां पर लस्सी पी जा रही थी। विधायक ने पूछा कि शराब की बोतल में लस्सी कहां सप्लाई होती है, पुलिस इसका जवाब दे।

विधायक नीरज शर्मा की मां भाई के घर के बाहर तोड़फोड़ करते निगमकर्मी।

गलत मंशा के साथ मेरी मां के घर की गई तोडफ़ोड़ : विधायक
विधायक शर्मा ने बताया जिस घर पर तोडफ़ोड़ की गई है वहां उनकी बुजुर्ग मां रहती हैं और उन्होंने यहां एक एक फुट ऊंची ईंट इसलिए लगवाई थीं क्योंकि गली के ऊपर हो जाने से उनका मकान नीचा हो गया है जिसमें बारिश का पानी भर जाता है। जिससे न केवल फर्नीचर और दीवारें खराब हो जाती हैं बल्कि सामान्य कामकाज भी बाधित हो जाता है।
विधायक नीरज शर्मा ने बताया कि कॉलोनी में गलियां और सडक़ें बार बार बनने के कारण मकान नीचे हो गए हैं जिसके कारण बारिश के पानी घरों में भरता है। अब एक मां ने उस बारिश के पानी से अपना घर बचाने के लिए दो ईंट लगा लीं, जिसे आज अतिक्रमण का नाम दिया जा रहा है। यदि पार्षद सुरेंद्र अग्रवाल व अन्य को कोई कार्रवाई करवानी थी तो वह मुझ पर करवाते। उन्होंने मेरी मां के खिलाफ कार्रवाई करवाई है। जबकि चार मकानों की इस गली में किसी को उससे कोई दिक्कत नहीं है। दूसरा यह गली आम गुजरने की गली भी नहीं है।
और किसी का मकान नहीं डूबने दूंगा : विधायक
विधायक नीरज शर्मा ने व्हाइट मिर्ची के सवाल के जवाब में कहा कि मेरी मां का घर तो डूब गया लेकिन अब मैं एनआईटी में किसी गली अथवा सडक़ के निर्माण के कारण लोगों के मकान नीचे नहीं होने दूंगा। श्री शर्मा ने कहा कि नगर निगम के नियमों में सामान्यतया यह टेंडर का नियम है कि पिछली परत को उखाडक़र नया निर्माण होना चाहिए जिसका समय और पैसा बचाने के लिए ठेकेदार पालन नहीं करते हैं। नतीजतन मकान धीरे धीरे नीचे हो जाते हैं और सडक़ व गलियां ऊंची हो जाती हैं जिससे लोगों को जलभराव व जलजमाव की दिक्कतें पेश आती हैं। उन्होंने कहा कि वह आने वाले टेंडरों में यह बात लागू करवाएंगे कि नया निर्माण ऊंचा न हो और पिछली परत को उखाडक़र ही किया जाए।

मॉनसून आने पर दिखाऊंगी घर का हाल : माया शर्मा
विधायक की मां एवं पूर्व पार्षद माया शर्मा ने बताया कि कोई भी व्यक्ति यहां उनके घर को आकर देख सकता है। उनका मकान सडक़ से करीब ढाई फुट नीचे हो गया है। जब तक यह मकान तोडक़र दोबारा नहीं बनाया जाएगा, तब तक हमारे घर में बारिश का पानी भरता ही रहेगा। मेरी दो ईंट हटाने से यदि शहर अतिक्रमण मुक्त होता है तो नगर निगम यह भी कर ले। लेकिन अभी मॉनसून में मेरे घर का क्या हाल होगा, वो भी मैं सबको दिखाऊंगी।
विधायक के भाई मुनेश शर्मा ने बताया कि पिछली बारिश में उनके घर में शादी थी लेकिन बारिश का पानी घर में भरने से सारा सामान खराब हो गया था और रिश्तेदारों को बैठाना मुश्किल हो गया था।

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यूथ कांग्रेस का हाथ, नव धनाढ्यों के साथ

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यूथ कांग्रेस की चुनाव प्रक्रिया का अंदरखाते हो रहा भारी विरोध
कहीं रही बची इज्जत भी दांव पर न लगा दे विरोध की चिंगारी

फरीदाबाद। हरियाणा एवं गुजरात में प्रदेश यूथ कांग्रेस की चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही अंदरखाते विरोध की चिंगारी भी सुलगने लगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पेट्रोल मूल्यवृद्धि पर भाजपा को घेरने की कोशिश में लगी यूथ कांग्रेस ने सदस्यता शुल्क में 10 गुने की बढ़ोतरी की है। जो बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है और नवधनाढ्यों को राजनीति में स्थापित करने की साजिश है।
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं हरियाणा यूथ कांग्रेस के प्रभारी दीपक भाटी चोटीवाला ने बताया कि फिलहाल हरियाणा और गुजरात में कमेटियों के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है। कोविड के कारण थोड़ा देरी से लेकिन सदस्यता अभियान को दु्रत गति दी गई है। इसमें कोई भी 18 से 35 वर्ष का भारतीय नागरिक 50 रुपये का शुल्क देकर युवा कांग्रेस का सदस्य बन सकता है। जिसके लिए हम हर जिले में जाकर साथियों में जोश भर रहे हैं। गौरतलब है कि यह शुल्क गत चुनाव में पांच रुपये था।
गरीब कार्यकर्ता तो चुनाव नहीं लड़ पाएगा
यूथ कांग्रेस की स्थापना वर्ष 1960 में की गई थी, तब इसकी सदस्यता का शुल्क 50 पैसे था, जो समय के साथ बढ़ते बढ़ते गत चुनाव तक पांच रुपये और इस बार 50 रुपये हो गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें दौड़ में बने रहने के लिए हजारों की संख्या में सदस्य बनाने होंगे और यह सर्वविदित तथ्य है कि अधिकांश सदस्यों का शुल्क नेता को खुद ही देना पड़ता है। ऐसे में गरीब कार्यकर्ता तो पदाधिकारी बनने का सपना देख ही नहीं पाएगा।
जिसपे जितनी संख्या भारी, उसपे वैसी जिम्मेदारी
चुनाव की व्यवस्था ऐसी है कि सदस्यता जुटाने की क्षमता के हिसाब से कार्यकर्ताओं को पद दिए जाएंगे। ऐसे में एक अनुमान है कि विधानसभा के लिए कम से कम एक हजार, जिले के लिए पांच हजार और प्रदेश के लिए 10 हजार सदस्यों की संख्या मानक हो सकती है। इससे कम सदस्य बनाने वाले पदाधिकारी बनने का सपना न ही देखें तो अच्छा होगा।
मतलब साफ है कि विधानसभा में पदाधिकारी बनने के लिए 50 हजार, जिले में ढाई लाख और प्रदेश में पांच लाख रुपये जुटाने पड़ सकते हैं।
विरोध के कारण और भी हैं
विरोध का कारण केवल सदस्यता ही नहीं है बल्कि चुनाव नामांकन की फीस भी दोगुना किए जाने से संभावित दावेदार नाराज हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस कैसे महंगाई और मूल्यवृद्धि पर केंद्र सरकार को घेर सकती है जब उसने ही अपनी सदस्यता शुल्क में दस गुने की और नामांकन शुल्क में दोगुनी की वृद्धि की है।
चोटीवाला ने बताया कि विधानसभा स्तर के लिए 1500 रुपये, जिले के लिए 3000 रुपये और प्रदेश के लिए 7500 रुपये शुल्क रखा गया है। हालांकि अनुसूचित जाति/जनजाति के उम्मीदवारों को इसमें 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। लेकिन संभावित उम्मीदवार कहते हैं कि गरीबी जाति देखकर नहीं आती।
नवधनाढ्यों के लिए है सदस्यता अभियान
एक अनुमान के मुताबिक हरियाणा प्रदेश में सदस्यता का आंकड़ा 10 लाख की संख्या को पार कर सकता है। ऐसे में कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि करोड़ों रुपयों में जुटने वाली रकम के खैवनहार वही नव धनाढ्य होंगे जिनके पास पापा का पैसा तो है लेकिन पद नहीं है। गरीब कार्यकर्ता उनकी दरियों को बिछाने का कार्य पहले की तरह बदस्तूर करता रहेगा।
रिटर्निंग ऑफिसर भी कर रहे काम
अखिल भारतीय कमेटी द्वारा इस चुनाव प्रक्रिया को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए आंध्र प्रदेश के नरसिंह रेड्डी को जोनल रिटर्निंग अधिकारी बनाया गया है। वह कार्यकर्ताओं को वोटिंग, मेंबरशिप आदि का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
प्रदेश टीम में जुडऩे को आतुर
वैसे बता दें कि फरीदाबाद निवासी यूथ कांग्रेस प्रवक्ता पराग शर्मा व प्रदेश सचिव राजेश खटाना व अन्य ऐसे अनेक नाम हैं जो अपना कद बढ़ाना चाहते हैं। जानकारी के अनुसार यह लोग सदस्यता अभियान में जमकर दम लगा रहे हैं।

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