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वाह ज़िन्दगी

स्वामी सुदर्शनाचार्य ने क्यों कहा ‘तेरे बाप की है क्या रोटी

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तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा|

तन भी तेरा, मन भी तेरा |

धन भी तेरा, क्या लागे मेरा |

डॉ शांतनु दत्ता चौधुरी

यदि कोई बाबाजी आ जाये और कह दे कि भैय्या एक रोटी दे दो| तो कहते हैं,तेरे बाप की ‘ है क्या रोटी| शरीर हष्ट -पुष्ट है| लाल हो रहा है| कपड़े भी अच्छे पहने हुए हैं| रोटी माँगने आ गया| इस युवावस्था में भी कमा कर नहीं खाया जा सकता है क्या| इस तरह भीख माँगते तुझे शर्म नहीं आती है क्या| ”

आरती में गा रहे थे –
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा |
कथनी और करनी में कितना बड़ा अंतर  है| पहले भगवान को सब कुछ अर्पित कर रहे थे | अब एक रोटी के लिए ही मुँह मोड़ लिया| मानव के मन में यह विरोधाभास है कि प्रकृति उसे मोह बंधन से छुटकारा नहीं दे सकती है |
बाबाजी भगवान के आश्रित हैं, पर घरों में उनको धक्का मार दिया जाता है| कुछ समय पूर्व यह कह रहे थे कि तेरा तुझको अर्पण और दूसरे ही क्षण दुत्कारना | यह भगवान को चिढ़ाने वाली बात है|
बोलेंगे, कोठा मुण्डेला में भायाजी हाथ मत दे, बाकी पूरा घर थारा ही है और अय्या कमरा में मत जाइओ, बाकि सब घर थारो है,” और घर में रखा क्या है मुझे बताएं|
मानव कितना स्वार्थी है ?
भगवान ने उसे तन धन सम्मान सब कुछ दिया |
उसने धन को तिजोरियों से भर दिया और अहंकार में जीने लगा | इस प्रकार वह कहता तो यही है कि भगवान यह सब कुछ धन आपका ही है किंतु जब देने का अवसर आता है तो वह कृपण बन जाता है | एक पैसा भी उससे नहीं देता है क्योंकि उसने धन सम्पदा को अपना मान लिया ही|
भगवान की दी हुई वस्तु को अपना कहना, यह अहंकार का सूचक है | क्या यह उस परमात्मा से बेईमानी नहीं है ? क्या यह परमात्मा की दी हुई वस्तु का दुरुपयोग नहीं है? मानव का यह भ्रम है जो कुछ मेरे पास एकत्र है वह मेरे द्वारा अर्जित है | वह यहाँ ईश्वर की कृपा को स्वीकार नहीं करता है?
जबकि जन्म जन्मांतरों के कर्मों  के कारण प्रारब्ध स्वरुप उसे सम्पति प्राप्त हुई हैं और यह सब भगवान के अनुग्रह के कारण ही हुए है | किंतु वह अपने आपको सम्पदा का स्वामी कहता है और किसी को देना नहीं चाहता| यह उस सम्पदा के प्रति मोह है और मोह ही उसके बंधन का कारण है |
लक्ष्मी का पति भगवान है| लक्ष्मी पति तो एक ही है और वह भगवान विष्णु है | यदि उसकी पत्नी के प्रति दुर्भावना रखेंगे तो ऐसी मार खायंगे कि एक भी बाल नहीं बचेगा, क्योंकि यह सर्वशक्तिमान पति है| कोई सामान्य आदमी नहीं है| लक्ष्मी को तिजोरियों में भरकर छिपाकर रखना महापाप है | यदि कोई इस प्रकार का पाप करता है तो वह बड़े भारी दंड का भागीदार है | वह भगवान से ही चोरी कर रहा है|
हमारा कर्तव्य यह है कि उसकी पत्नी लक्ष्मी को उसकी सेवा में लगा दें | यही हमारा धर्म है, यही हमारा कर्म है, यही कर्तव्य है और यही परम् लक्ष्य है, सृष्टि का नियम है कि पत्नी ही पति की सेवा कर  सकती है | परमात्मा की पत्नी लक्ष्मी है | उसको छिपाकर रखना भगवान के साथ बेईमानी करना है |
अब आप ही बताइये कि हम परमात्मा से चोरी नहीं कर रहे हैं क्या |
छोटी -मोटी बात तो हमारे अंदर है | मेरे अंदर तो मोटी चोरी है | मैं तो बड़ा चोर हूँ क्योंकि उस परमात्मा के तुम्हारे द्वारा किया हुआ दान भी सबका संग्रह कर रहा हूँ | परन्तु मेरे प्रेमियों ! लक्ष्य के लिए जो मैंने कहा था, शायद आप प्रश्न करना चाहें, इस शंका को मैं ही मिटा दूँ |
आप कल कहें कि यह बाबा इतनी बड़ी बड़ी बातें कर गया और खुद आश्रम के चक्कर में मकान बनाता चला जा रहा है, मंदिर बनाता चला जा रहा है |
मैं कहता हूँ, ऐसा लक्ष्य तो आप प्रेमी भी बनाओ | यह तो उत्तम लक्ष्य है | मैं अपने लिए नहीं, परमात्मा के लिए, आप लोगों के लिए कर रहा हूँ |
इसीलिए, ऐसा लक्ष्य यदि आप लोग बनाएं तो हमारे भारतवर्ष का कल्याण हो जाये, निश्चित ही हो जाये, शत प्रतिशत हो जाये| ऐसा लक्ष्य तो होना ही चाहिए | परहित के लिए होना ही चाहिए | उस लक्ष्य को मैं मना कर रहा हूँ, जो केवल अपने लिए हो|
(स्वामीजी फरीदाबाद स्थित श्री सिद्धदाता आश्रम के संस्थापक हैं| प्रस्तुत विचार उनके प्रवचन संग्रह मानवता से उद्धृत है|)
प्रस्तुति : डॉ शांतनु दत्ता चौधुरी
प्रभु कृपा सतगुरु प्रसाद वर्ल्ड मिशन

वाह ज़िन्दगी

कैसे जानिए आज का अपना राशिफल

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हमारे देश में लोग अपने भविष्य राशिफल के बारे में जानने  में बहुत ही उत्सुक होते  हैं तो  आज हम आपको आपके राशिफल के बारे में बताते हैं |  ज्योतिष शास्त्र में कुल 12 राशियां बताई गई हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राशि से इंसान के स्वभाव और भविष्य आदि का पता लगाया जा सकता है।इन सभी 12 राशियों में से 4 राशियां ऐसी भी हैं, जिन पर मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।

1 -वृष राशि-वृष राशि का स्वामी शुक्र होने के कारण इस राशि के जातकों पर मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को धन, वैभव और संपन्नता का कारक बताया गया है।

2 -वृश्चिक राशि-कहते हैं कि इस राशि के जातकों को कभी भी आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। यह अपनी सूझबूझ से हर समस्या का हल खोज लेते हैं। इस राशि के जातक स्वभाव से मेहनती होते हैं और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद सदैव इन पर बना रहता है।

3 -कर्क राशि-कहते हैं कि इस राशि के जातकों का जीवन सुख-सुविधाओं वाला होता है। यह लोग मेहनती होते हैं। एक बार जो काम करने का फैसला लेते हैं, उसे करके ही दम लेते हैं। मां लक्ष्मी का साथ सदैव बना रहता है।

4 -सिंह राशि- कहते हैं कि सिंह राशि के जातक धार्मिक स्वभाव के होते हैं और यह कड़ी मेहनत से नहीं भागते। यह अपनी सुख-सुविधाओं के लिए खूब मेहनत करते हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, कुशल नेतृत्व की क्षमता वाले इन जातकों पर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद सदैव बना रहता है।

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वाह ज़िन्दगी

माँगना छोड़ो, आज्ञाकारी बनों

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डॉ शांतनु दत्ता चौधुरी

अधिकतर लोगों की मान्यता है कि भगवान प्रसन्न होंगे, तब वह हमें कुछ देंगे| इसका तातपर्य है कि हमारे पास बुद्धि है ही नहीं, क्योंकि माँगना बहुत छोटी हैं| मांग लेने से यह भी हो सकता है कि इंसान ऐसी चीज मांग ले, जिससे  नर्क में जाना पड़ें| मांगने से यह भी हो सकता है कि आदमी इतनी विलसिता में फँस जाएं कि बाद में वह मनुष्य से राक्षस बन जाए|

जैसा कि आजकल आप देख रहे हैं कि जब वह भगवान कृपा करते हैं तो इंसान अपनी कड़ी तपस्या के बदले सांसारिक सुख ही मांगता है| ऐसे में में लोग मानवता को छोड़ बैठते हैं| क्या क्या कर लेते हैं, मारपीट कर बैठते हैं| यह आपको विचार करना है| मैं उनको पापी नहीं कहता| मैं  उनको भगवान के लाडले बच्चे कहता हूँ| उन्होंने ज्यादा लाड पा लिया है, इसलिए बिगड़ गए हैं|
बिगड़े हुए जो लोग हमारे समाज में हैं, वे शायद ज्यादा लाडले हैं| परन्तु उन लाड़लो का अंत क्या होता है? यह आप विचार कीजिये| इसीलिए हम भगवान के लाडले नहीं, उनके आज्ञाकारी बनें| उनकी आज्ञा में रहें, उनको स्वीकार करें|
जैसे-जैसे वह कहते हैं, उसी पूर्ण सुख की प्राप्ति करें| हम मंगते न बनें| छोटी छोटी बात पर हम अपनी तपस्या खत्म कर देते हैं| छोटी-छोटी बातों में हम श्रद्धा,विश्वास को खो बैठते हैं| इससे हमारा बड़ा भरी नुकसान होता है| इसलिए जो प्रभु की इच्छा, गुरु इच्छा हो उसी में संतुष्ट रहना चाहिए|
(स्वामीजी फरीदाबाद स्थित श्री सिद्धदाता आश्रम के संस्थापक हैं| प्रस्तुत विचार उनके प्रवचन संग्रह मानवता से उद्धृत है|)
प्रस्तुति : डॉ शांतनु दत्ता चौधुरी
प्रभु कृपा सतगुरु प्रसाद वर्ल्ड मिशन
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वाह ज़िन्दगी

श्रीराम मंदिर की प्रसन्नता में दिव्यधाम में भव्य प्रकाश

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फरीदाबाद। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए पांच अगस्त को हुए भूमि पूजन पर प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए श्री सिद्धदाता आश्रम स्थित श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम में भव्य रोशनी की गई। इस अवसर पर अधिपति जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीराम केवल हिंदुओं के ही नहीं अपितु समस्त मानव जाति के आदर्श हैं।
स्वामी जी के निर्देश पर दिव्यधाम एवं श्रीराम दरबार पर दीयों के साथ जोरदार रोशनी की गई। इस अवसर पर स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य ने बताया कि हम सबको भगवान के मंदिर निर्माण की लंबे समय से प्रतीक्षा थी जो अब पूरी होने जा रही है। हम सभी इस बात से अति प्रसन्न हैं। उन्होंने बताया कि आज देश के प्रधानमन्त्री जी ने भगवान के मंदिर के लिए भूमि पूजन किया है। तो एक ऐसा समय आ गया है कि हमारे मर्यादा के शीर्ष का मंदिर बनने जा रहा है। इस बात से दुनिया भर के हिन्दुओं और सनातन परंपरा को मानने वालों में प्रसन्नता की लहर है। उन्होंने कहा कि भगवान ने पुरुषोत्तम बनने के लिए नहीं बल्कि हम मानवों को पुरुषोत्तम बनाने के लिए मर्यादा का आचरण पेश किया। आज भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण कार्य के प्रारंभ होने पर आश्रम परिसर में प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए श्रीराम दरबार को विशेष रूप से सजाया गया। यहां दीयों की रोशनी में श्रीराम की वंदना कर समस्त संसार पर कृपा करने की प्रार्थना की गई। गौरतलब है कि मंदिर भक्तों के लिए बंद है और अर्चकों द्वारा ही यहां पूजन आदि नियमित किया जा रहा है।
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वाह ज़िन्दगी17 hours ago

कैसे जानिए आज का अपना राशिफल

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ज्यादा प्रोटीन भी कर सकती है आपका नुक्सान

बक Lol18 hours ago

दिल, दोस्ती, यारी यानि बहुत पर्सनल बात है

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क्या ख़ासियत है इसमें जो मोदी ने अयोध्या में रोपा यह पौधा

बचल खुचल19 hours ago

यह पानी नहीं दवा है क्या आपको इसकी जरूरत है

वाह ज़िन्दगी19 hours ago

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क्यों भिड़ गए प्रियंका गाँधी और मोदी के मंत्री ?

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”तू धूल है और धूल में तू मिल जाएगा ”

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