Connect with us

बक Lol

वैंकय्या नायडू का हिन्दी भाषा का दर्द समझें

Published

on

 

Lalit Garg

whitemirchi.com

हिन्दी की दुर्दशा आहत करने वाली है। इस दुर्दशा के लिये हिन्दी वालों का जितना हाथ है, उतना किसी अन्य का नहीं। अंग्रेजों के राज में यानी दो सौ साल में अंग्रेजी उतनी नहीं बढ़ी, जितनी पिछले सात दशकों में बढ़ी है। इस त्रासद स्थिति की पड़ताल के लिये हिन्दी वालों को अपना अंतस खंगालना होगा। पैसा, तथाकथित आधुनिकता, समृद्धि एवं राजनीतिक मानसिकता इसके कारण प्रतीत होते हैं तो भी इसकी सूक्ष्मता में जाने की जरूरत है। यह खुशी की बात है कि उपराष्ट्रपति वैंकय्या नायडू इन दिनों हिंदी को प्रोत्साहन देने की लिये प्रयास कर रहे हैं, जबसे वे उपराष्ट्रपति बने हैं, अपने हर भाषण में हिन्दी को उसका स्थान दिलाने की बात करते हैं।
गतदिनों उन्होंने हिन्दी के बारे में ऐसी बात कह दी है, जिसे कहने की हिम्मत महर्षि दयानंद, महात्मा गांधी और डाॅ. राममनोहर लोहिया में ही थी। उन्होंने कहा कि ‘अंग्रेजी एक भयंकर बीमारी है, जिसे अंग्रेज छोड़ गए हैं।’’ अंग्रेजी का स्थान हिंदी को मिलना चाहिए, लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी सरकारें अपना काम-काज अंग्रेजी में करती हैं, यह देश के लिये दुर्भाग्यपूर्ण एवं विडम्बनापूर्ण स्थिति है। वैंकय्या नायडू का हिन्दी को लेकर जो दर्द एवं संवेदना है, वह सही और अनुकरणीय है। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी राष्ट्र एवं राज भाषा हिन्दी का सम्मान बढ़ाने एवं उसके अस्तित्व एवं अस्मिता को नयी ऊंचाई देने के लिये अनूठे उपक्रम किये हैं। हिन्दी राष्ट्रीयता एवं राष्ट्र का प्रतीक है, उसकी उपेक्षा एक ऐसा प्रदूषण है, एक ऐसा अंधेरा है जिससे छांटने के लिये ईमानदारी से लड़ना होगा। क्योंकि हिन्दी ही भारत को सामाजिक-राजनीतिक और भाषायिक दृष्टि से जोड़नेवाली भाषा है। हिन्दी को सम्मान दिलाने के लिये नायडू के प्रयास राष्ट्रीयता को सुदृढ़ करने की दि में एक अनुकरणीय एवं सराहनीय पहल है। ऐसा करके वे महात्मा गांधी, गुरु गोलवलकर और डाॅ. राममनोहर लोहिया के सपने को साकार कर रहे है।
देश में एक तबका अंग्रेजी मानसिकता का है। जो आवश्यक मानदंडों की उपेक्षा करते हुए जिस तरह की भाषाई विकृतियां प्रस्तुत कर रहा है, उस पर हल्ला बोलने की आवश्यकता है। लेकिन हम में यानी हिन्दीभाषियों में अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम और प्रतिबद्धता अभी तक जागृत नहीं हो पाई है। वैंकय्या नायडू के इस ताजा बयान ने भारत के अंग्रेजी मानसिकता के दिमागों में खलबली मचा दी है। कई अंग्रेजी अखबारों और टीवी चैनलों ने वैंकय्याजी के बयान पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनके खिलाफ अंग्रेजी अखबारों में लेख लिखे जा रहे हैं? क्यों हो रहा है, ऐसा? क्योंकि उन्होंने देश के सबसे बौद्धिक और ताकतवर तबके शाकी दुखती रग पर उंगली रख दी है। हिन्दी भाषा का मामला भावुकता का नहीं, ठोस यथार्थ का है। हिन्दी विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ ही हमारी राजभाषा भी है, यह हमारे अस्तित्व एवं अस्मिता की भी प्रतीक है, यह हमारी राष्ट्रीयता एवं संस्कृति की भी प्रतीक है। भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद ही हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए 1953 से सम्पूर्ण भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है। गांधीजी ने राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी की वकालत की थी। वे स्वयं संवाद में हिन्दी को प्राथमिकता देते थे। आजादी के बाद सरकारी काम शीघ्रता से हिन्दी में होने लगे, ऐसा वे चाहते थे। राजनीतिक दलों से अपेक्षा थी कि वे हिन्दी को लेकर ठोस एवं गंभीर कदम उठायेंगे। लेकिन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति से आक्सीजन लेने वाले दल भी अंग्रेजी में दहाड़ते देखे जा सकते हैं। हिन्दी को वोट मांगने और अंग्रेजी को राज करने की भाषा हम ही बनाए हुए हैं। कुछ लोगों की संकीर्ण मानसिकता है कि केन्द्र में राजनीतिक सक्रियता के लिये अंग्रेजी जरूरी है। ऐसा सोचते वक्त यह भुला दिया जाता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जैसे शीर्ष पर बैठे नेता बिना अंग्रेजी की दक्षता के सक्रिय और सफल है। नायडू एक अहिन्दी प्रांत से होकर भी हिन्दी में बोलते हैं, उसे आगे बढ़ाने की बात करते हैं।
हिन्दी राष्ट्रीयता की प्रतीक भाषा है, उसके लिये नायडू की संवेदना और दर्द बार-बार उजागर हो रहा है, लेकिन अंग्रेजी तबका उन पर ‘हिंदी साम्राज्यवाद’ का आरोप लगा रहा है और उनके विरुद्ध उल्टे-सीधे तर्कों का अंबार लगा रहा है। नायडू ने यह तो नहीं कहा कि अंग्रेजी में अनुसंधान बंद कर दो, अंग्रेजी में विदेश नीति या विदेश-व्यापार मत चलाओ या अंग्रेजी में उपलब्ध ज्ञान-विज्ञान का बहिष्कार करो। उन्होंने तो सिर्फ इतना कहा है कि देश की शिक्षा, चिकित्सा, न्याय प्रशासन आदि जनता की जुबान में चलना चाहिए। दो मराठी या बांग्ला भाषी लोग अंग्रेजी जानते हुए भी अपनी भाषा में बात करते हुए गर्व महसूस करते हैं। लेकिन हिन्दी में प्रायः ऐसा नहीं होता। हिन्दी वाला अपनी अच्छी हिन्दी को किनारे कर कमजोर अंग्रेजी के साथ खुद को ऊंचा समझने का भ्रम पालता है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्यों हम खुद ही अपनी भाषा एवं अपनी संस्कृति को कमजोर करने पर तुले हैं?
भारत लोकतांत्रिक राष्ट्र है लेकिन लोक की भाषा कहां है? हिन्दी को हमने पांवों में बिठा दिया है और अंग्रेजी को सिंहासन पर बिठा रखा है। नायडूजी अंग्रेजी का नहीं, उसके वर्चस्व का विरोध कर रहे थे। यदि भारत के पांच-दस लाख छात्र अंग्रेजी को अन्य विदेशी भाषाओं की तरह सीखें और बहुत अच्छी तरह सीखें तो उसका स्वागत है लेकिन 20-25 करोड़ छात्रों के गले में उसे पत्थर की तरह लटका दिया जाए तो क्या होगा? हिंदी को दबाने की नहीं, उपर उठाने की आवश्यकता है। लेकिन अंग्रेजी के वर्चस्व के कारण आज भी हिन्दी भाषा को वह स्थान प्राप्त नहीं है, जो होना चाहिए। चीनी भाषा के बाद हिन्दी विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा है। भारत और अन्य देशों में 70 करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। पाकिस्तान की तो अधिकांश आबादी हिंदी बोलती व समझती है। बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यांमार, अफगानिस्तान में भी लाखों लोग हिंदी बोलते और समझते हैं। फिजी, सुरिनाम, गुयाना, त्रिनिदाद जैसे देश तो हिंदी भाषियों द्वारा ही बसाए गये हैं। दुनिया में हिन्दी का वर्चस्व बढ़ रहा है, लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं होना, बड़े विरोधाभास को दर्शाता है।
हिन्दी को सही अर्थों में राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं मिलने के पीछे सबसे बड़ी बाधा सरकार के स्तर पर है क्योंकि उसके उपयोग को बढ़ावा देने में उसने कभी भी दृढ़ इच्छा शक्ति नहीं दिखाई। सत्तर साल में बनी सरकारों के शीर्ष नेता यदि विदेशी राजनेताओं के साथ हिन्दी में बातचीत का सिलसिला बनाये रखते तो इससे तमाम सरकारी कामकाज में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा मिलता। प्रसन्नता हैं कि वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने इस दिशा में पहल की है। उन्होंने अपनी विदेश यात्राओं में हिन्दी में भाषण देकर और विदेशी प्रतिनिधियों से हिन्दी भाषा में ही बातचीत करके एक साहसिक उपक्रम किया है। प्रधानमन्त्री की यह भावना राष्ट्र भाषा के प्रति सम्मान और समर्पण को दर्शाती है।
किसी भी देश की भाषा और संस्कृति किसी भी देश में लोगों को लोगों से जोड़े रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। भाषा राष्ट्र की एकता, अखण्डता तथा प्रगति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है। कोई भी राष्ट्र बिना एक भाषा के सशक्त व समुन्नत नहीं हो सकता है अतः राष्ट्र भाषा उसे ही बनाया जाता हैं जो सम्पूर्ण राष्ट्र में व्यापक रूप से फैली हुई हो। जो समूचे राष्ट्र में सम्पर्क भाषा के रूप में कारगर सिद्ध हो सके। राष्ट्र भाषा सम्पूर्ण देश में सांस्कृतिक और भावात्मक एकता स्थापित करने का प्रमुख साधन है। महात्मा गांधी ने सही कहा था कि राष्ट्र भाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है। राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की एकता और अखण्डता तथा उन्नति के लिए आवश्यक है।’ राष्ट्र भाषा के रूप में हिन्दी को प्रमुखता से स्वीकार किया गया है। क्योंकि इसे बोलने वालों की सर्वाधिक संख्या है। यह बोलने, लिखने और पढ़ने में सरल है। इसलिये शिक्षा का माध्यम भी मातृभाषा होनी चाहिए क्योंकि शिक्षा विचार करना सिखाती है और मौलिक विचार उसी भाषा में हो सकता है जिस भाषा में आदमी सांस लेता है, जीता है। जिस भाषा में आदमी जीता नहीं उसमें मौलिक विचार नहीं आ सकते। अंग्रेजी बोलने वाला ज्यादा ज्ञानी और बुद्धिजीवी होता है यह धारणा हिन्दी भाषियों में हीन भावना ग्रसित करती है। हिन्दी भाषियों को इस हीन भावना से उबरना होगा। हिन्दी किसी भाषा से कमजोर नहीं है। हमें जरूरत है तो बस अपना आत्मविश्वास मजबूत करने की। यह कैसी विडम्बना है कि जिस भाषा को कश्मीर से कन्याकुमारी तक सारे भारत में समझा जाता हो, उस भाषा के प्रति घोर उपेक्षा व अवज्ञा के भाव, हमारे राष्ट्रीय हितों में किस प्रकार सहायक होंगे। हिन्दी का हर दृष्टि से इतना महत्व होते हुए भी प्रत्येक स्तर पर इसकी इतनी उपेक्षा क्यों? इस उपेक्षा को उपराष्ट्रपति वैंकय्या नायडू के अनूठे प्रयोगों से ही दूर किया जा सकेगा। इसी से देश का गौरव बढ़ेगा।

(ललित गर्ग)
बी-380, प्रथम तल, निर्माण विहार, दिल्ली-110092
 9811051133
Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बक Lol

नगर निगम ने फरीदाबाद शहर को बना दिया कूड़े का ढेर – जसवंत पवार

mm

Published

on

वैसे तो फरीदाबाद शहर को अब स्मार्ट सीटी का दर्जा प्राप्त हो चूका है, परन्तु शहर के सड़कों पर गंदगी के ढेर  फरीदाबाद प्रशासन और नगर को आइना दिखा रहे हैं

शहर के अलग अलग मुख्य चौराहों और सड़कों पर पढ़े कूड़े के ढेर को लेकर समाज सेवी जसवंत पवार ने फरीदाबाद प्रशासन और नगर निगम कमिश्नर से पूछा है कि एक तरफ भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी कहते हैं कि स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत मुहिम को पूरे देश में चला रहे हैं वही नगर निगम इस पर पानी फेरता दिख रहे हैं फरीदाबाद में आज सड़कों पर देखे तो गंदगी के ढेर लगे हुए हैं पूरे शहर को इन्होंने गंदगी का ढेर बना दिया है। जिसके चलते फरीदाबाद शहर अभी तक एक बार भी स्वछता सर्वेक्षण में अपनी कोई अहम् भूमिका अदा नहीं कर पा रहा,  अगर ऐसे ही चलता रहा तो हमारा फरीदाबाद शहर स्वच्छता सर्वे में फिर से फिसड्डी आएगा। साल 2021 में स्वछता सर्वेक्षण 1 मार्च से 28 मार्च तक किया जाना है जिसको लेकर लगता नहीं की जिला प्रसाशन व फरीदाबाद के नेता और मंत्री फरीदाबाद शहर की स्वछता को लेकर बिल्कुल भी चिंतित दिखाई नहीं पढ़ते है।

जसवन्त पंवार ने फरीदाबाद वासियों से अनुरोध और निवेदन किया है अगर हमें अपना शहर स्वच्छ और सुंदर बनाना है तो हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे जहां पर भी गंदगी के ढेर हैं आप वीडियो बनाएं सेल्फी ले फोटो खींचे और नेताओं और प्रशासन तक उसे पहुंचाएं, हमें जागरूक होना होगा तभी जाकर यह फरीदाबाद शहर हमारा स्वच्छ बन पाएगा। आप हमें इस नंबर पर वीडियो और फोटो भेज सकते हैं

Continue Reading

बक Lol

क्यों हर दो महीने में आता है बिजली का बिल?

mm

Published

on


हम सभी अपने कुछ रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली चीजों के बिलों का भुगतान हर महीने करते हैं। जैसे बैकों की किश्तंे, घर का किराया इत्यादि। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर फरमाया है कि जब हर चीज का भुगतान हम महीने दर महीने करते हैं। तो बिजली के बिल का ही भुगतान हर दो महीने में क्यों?

इस पर बिजली निगम का कहना है कि बिलिंग प्रक्रिया से जुड़ी एक लागत होती है। जिसमें मीटर रीड़िंग की लागत, कम्प्यूटरीकृत प्रणाली में रीडिंग फीड़ करने की लागत, बिल जेनरेशन की लागत, प्रिंटिग और बिलों को वितरित करने की लागत आदि चीजें शामिल होती हैं। इन लागतों को कम करने के लिए बिलिंग की जाती हैं। इसलिए बिजली बिल 2 महीने में आता है।
फिलहाल बिजली निगम 0-50 यूनिट तक 1.45 रूपये प्रति यूनिट, 51-100 यूनिट तक 2.60 रूपये प्रति यूनिट चार्ज करता है।
आप यह अनुमान लगाइए कि यदि किसी छोटे परिवार की यूनिट 50 से कम आती है। तो उसका चार्ज 1.45 रूपये प्रति यूनिट होगा लेकिन जब बिल दो महीने में जारी होगा। तो उसका 100 यूनिट से उपर बिल आएगा। मतलब साफ है कि उसे प्रति यूनिट चार्ज 2.60 रूपये देना होगा । ऐसे में उस गरीब को सरकार की छूट का लाभ नहीं मिला लेकिन सरकार ने पूरी वाह-वाही लूट ली।
आप यह बताइए जिस घर में सदस्य कम है। तो उस घर की बिजली खपत भी कम होगी और बिल भी कम ही आएगा। मतलब साफ है उपयोग कम तो यूनिट भी कम। यदि बिजली बिल एक महीने में आता है तभी ही तो जनता को इसका लाभ मिलेगा।
लेकिन चूंकि बिल दो महीने में आता है इसलिए गरीब को या छोटे परिवार को महंगी बिजली प्रयोग करनी पड़ रही है।
एक तरफ बिजली निगम अपना फायदा देख रहा है। तो दूसरी तरफ सरकार सस्ती बिजली की घोषणा करके, एक राजनीतिक मुद्द्ा बना कर, जनता की वाह-वाही लूट रही है। लेकिन जनता को लाभ मिल ही नहीं रहा क्योंकि सरकार तो दो महीने में लोगों को बिल दे रही हैं। इसलिए जब महीने में एक बार बिल आएगा तभी आम जनता को लाभ प्राप्त होगा। सरकार कब तक जनता को अपने घोषणाओं के जाल में फंसाती रहेगी? कब जनता को अपनी दी हुई पूंजी का सही लाभ प्राप्त होगा?

Continue Reading

बक Lol

क्यों राहुल गांधी बिना किसी बात के भी फंस जाते हैं?

mm

Published

on


आई ए एस अधिकारी टीना डाबी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर सोशल मीडिया में ट्रोल हो गए हैं। खबर बस इतनी है कि दलित समाज से आने वाली टीना मुस्लिम समाज से आने वाले अपने पति अतहर से तलाक ले रहीं हैं।

दिल्ली शहर की रहने वाली 24 वर्षीय टीना डाबी जो 2015 की सिविल परीक्षा में टाॅप करके आई ए एस अधिकारी बनी थी। उन्होंने कश्मीर के मटट्न नामक शहर में रहने वाले अतहर खान से शादी कर ली जो उसी परीक्षा में दूसरे स्थान पर था।
टीना पहली दलित महिला थी जिसने यूपीएससी की परीक्षा में टाॅप किया था।
टीना और अतहर की शादीशुदा जोड़ी को उनके विवाह के दौरान जय भीम और जय मीम की एकता, मुस्लमान और दलितों के बीच में सबधों की मिसाल बताया गया था। उस समय राहुल गांधी ने स्वंय अपने ट्वीटर अकांउट से ट्वीट करते हुए कहा था कि ये जोड़ी मिसाल कायम करेगी। यह हिंदू, मुस्लमानों की एकता का प्रतीक है।
लेकिन आपसी मतभेदों के कारण जयपुर के पारिवारिक न्यायालय में इस जोड़ी ने तलाक की अर्जी दाखिल की है। अब ये जोड़ी तलाक ले रही हैं और लोग राहुल गांधी को लानत दे रहे हैं ‘दिख गई सहजता। दिखा लिया भाईचारा।।‘
आज कांग्रेस की जो हालत है या राहुल गांधी की जो हालत है वो इस वजह से है क्योंकि राहुल ने हर मुद्दे में केवल जाति व धर्म का एंगल खोजा और उसका तुष्टीकरण किया। उन्होंने सर्व समाज से बातें करने में हमेशा परहेज किया। केवल धर्म और जातियों में खास दृष्टिकोण खोजते रहे।
अब तक देखने में आया है कि घटना किसी दलित के साथ हुई है तो वह एक्शन लंेगे और यदि वह दलित कांग्रेस शासित राज्य में है तो एक्शन नहीं लेंगे। उसी प्रकार कोई घटना मुस्लिम के साथ है तो वह आवाज उठाएंगे और यदि वह मुस्लिम अपने शासित राज्य में है तो वो आवाज दबा दंेगे।
इसी कारण से कांग्रेस की हालत यह हो गई है कि लोग उन्हें धर्म और जाति का मुद्दा उठते ही लोग लानत देने लगते हैं।

Continue Reading
सिटी न्यूज़4 days ago

मूल्यावृद्धि रोकने में केंद्र विफल : लखन सिंगला

सिटी न्यूज़2 weeks ago

डॉ सतीश फौगाट बने जेजेपी बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष

WhiteMirchi TV3 weeks ago

जाति छोड़ना मुश्किल और धर्म छोड़ना आसान है क्या ?

WhiteMirchi TV1 month ago

ऐसे मिलेगा जाति से छुटकारा !!!!

खास खबर1 month ago

करोना से हार गए सुरों के बंधु विश्वबंधु

WhiteMirchi TV2 months ago

कैसे लिंगायाज विद्यापीठ छात्रों को बेचने लायक बना रही है?

WhiteMirchi TV2 months ago

काम ऊर्जा के बारे में लेखक हुकम सिंह दहिया के शब्द

खास खबर2 months ago

लिंग्याज ने बनाया क्रेडिट कार्ड साइज का कंप्यूटर

खास खबर2 months ago

सीटीओ एंजियोप्लास्टी स्टेंटिंग से बाईपास सर्जरी से बचाव संभव : डा. बंसल

सिटी न्यूज़3 months ago

ट्रांसफार्मेशन महारथियों को गुरु द्रोणाचार्य अवार्ड

WhiteMirchi TV3 weeks ago

जाति छोड़ना मुश्किल और धर्म छोड़ना आसान है क्या ?

WhiteMirchi TV1 month ago

ऐसे मिलेगा जाति से छुटकारा !!!!

WhiteMirchi TV2 months ago

कैसे लिंगायाज विद्यापीठ छात्रों को बेचने लायक बना रही है?

WhiteMirchi TV2 months ago

काम ऊर्जा के बारे में लेखक हुकम सिंह दहिया के शब्द

WhiteMirchi TV1 year ago

अपनी छाती न पीटें, मजाक न उड़ाएं…. WhiteMirchi

WhiteMirchi TV1 year ago

लेजर वैली पार्क बना किन्नरों की उगाही का अड्डा WhiteMirchi

WhiteMirchi TV1 year ago

भांकरी फरीदाबाद में विद्यार्थी तेजस्वी तालीम शिविर में भाग लेंगे फौगाट स्कूल के बच्चे| WhiteMirchi

WhiteMirchi TV1 year ago

महर्षि पंकज त्रिपाठी ने दी कोरोना को लेकर सलाह WhiteMirchi

WhiteMirchi TV1 year ago

डीसी मॉडल स्कूल के छात्र हरजीत चंदीला ने किया फरीदाबाद का नाम रोशन | WhiteMirchi

WhiteMirchi TV1 year ago

हरियाणा के बच्चों को मिलेगा दुनिया घूमने का मुफ्त मौका WhiteMirchi

लोकप्रिय